Thursday, 19 January 2023

ये है दुनिया की सबसे महंगी गणेश भगवान की मूर्ती, कीमत 500 करोड़ से ज्यादा


गणेश भगवान की पूजा भारत में सभी भगवानों से पहले होती है. भगवान गणेश को बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक अपना आराध्य मानते हैं. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भगवान गणेश से जुड़े त्यौहार गणेश चतुर्थी खूब धूमधाम से मनाया जाता है. कुछ दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में पूरा महाराष्ट्र झूमता है. लोग बड़े-बड़े पंडाल में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं. ऐसे तो भगवान की किसी भी मूर्ति की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती, लेकिन जब आप दुकानदार से खरीद कर भगवान को अपने घर ले आते हैं तो उसके बदले में दुकानदार को एक रकम अदा करते हैं. भारत के ज्यादातर आम लोग यह रकम कुछ सौ या फिर कुछ हज़ार रुपए तक चुकाते हैं. कुछ लोग लाख रुपए तक की भी मूर्ति खरीदते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी मूर्ति की कीमत 500 करोड़ रुपए से ज्यादा हो. आज हम आपको एक ऐसी ही मूर्ति के बारे में बताएंगे.

भगवान गणेश की यह 500 करोड़ रुपए की मूर्ति बहुत ज्यादा विशालकाय नहीं है, इसकी ऊंचाई महज 2.44 सेंटीमीटर ही है. लेकिन इसे एक अनकट हीरे से बनाया गया है. इसी वजह से इस मूर्ति की कीमत लगभग 500 करोड़ रुपए आंकी गई है. देखने में आपको यह मूर्ति एक आम सफेद क्रिस्टल की मूर्ति जैसी लगेगी, लेकिन असलियत में यह एक हीरा है जो भगवान गणेश की मूर्ति की तरह दिखाई देता है.

किसके पास है यह मूर्ति

भगवान गणेश की अब तक की सबसे महंगी यह मूर्ति गुजरात के सूरत के एक व्यापारी राजेश भाई पांडव के पास है. राजेश भाई पांडव सूरत के कातरगाम में रहते हैं और उनकी एक पॉलिशिंग यूनिट है. इसके साथ ही राजेश भाई पांडव और भी कई तरह के व्यापार करते हैं. राजेश भाई और उनके परिवार वाले मानते हैं कि जब से भगवान गणेश की यह मूर्ति उनके घर में स्थापित हुई है, तब से वह दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं.

कहां से मिली थी यह मूर्ति

राजेश भाई पांडव को यह मूर्ति दक्षिण अफ्रीका में मिली थी. हालांकि, साल 2005 में जब इसकी नीलामी की जा रही थी तो इसे महज एक हीरे के तौर पर बेचा गया था. लेकिन राजेश भाई पांडव ने जब इसे देखा तो उन्हें इसमें भगवान गणेश की मूर्ति दिखाई दी, इसलिए उन्होंने इस अनकट हीरे को खरीद लिया. जिस वक्त राजेश भाई पांडव ने इसे खरीदा उस वक्त इसकी कीमत 29000 रुपए थी. इस मूर्ति को साल 2016 में सूरत में होने वाले हीरा उद्योग के वार्षिक प्रदर्शनी में भी पेश किया गया था.

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