Wednesday, 21 December 2022

मुंबई के एक IT प्रोफेशनल ने गंवाए 37 लाख से ज्यादा रूपये, ठगों ने ऐसे लूटा...


आजकल हर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साइबर अपराध का खतरा बढ़ गया है. लोगों को इस बारे में काफी जागरूक भी किया जाता है. इसके बावजूद भी अच्छे-अच्छे लोग अपराधियों का शिकार बन ही जाते हैं. इस बार एक घटना में मुंबई के एक IT प्रोफेशनल ने अपने 37.80 लाख रुपये गंवा दिए. इतनी बड़ी रकम गंवाने के पीछे बड़ी वजह अच्छा कमीशन था. आइए जानते हैं पूरी घटना के बारे में.


दरअसल, मुंबई मीरा रोड निवासी पीड़ित को एक 22 नवंबर को एक अज्ञात महिला की ओर से टेलीग्राम पर मैसेज मिला. द फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने पीड़ित को पैसा कमाने का एक ऑनलाइन ऑफर पेश किया था. महिला ने पीड़ित से कहा कि वह उनकी कंपनी के कुछ प्रोडक्ट्स को रेटिंग देकर अच्छा कमीशन पा सकते हैं.


दूसरी महिला ने किया संपर्क

पीड़ित शख्स से उनकी इच्छा जानने के बाद एक और दूसरी महिला ने उनसे संपर्क किया और एक वेबसाइट पर कुछ टास्क पूरा करने को कहा. महिला ने पीड़ित को एक वेबसाइट का लिंक दिया और इसमें लॉगिन करने को कहा. ठग महिला ने आगे कहा कि जैसे ही वह टास्क पूरा करेंगे उन्हें अच्छा पैसा मिलेगा और ये पैसा सीधे वेबसाइट की ई-वॉलेट में जाएगा.


इसके बाद IT प्रोफेशनल पीड़ित शख्स ने महिला द्वारा बताए गए टास्क को 28 नवंबर से पूरा करना शुरू कर दिया. पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, इनमें से एक टास्क अलग-अलग ट्रैवल प्रॉपर्टीज को फाइव-स्टार रेटिंग देने का था. पीड़ित शख्स को ठगों की ओर से ये भी कहा गया था कि उन्हें हर टास्क को खत्म करने के बाद कुछ प्रीमियम चार्ज भी देना होगा, जोकि बाद उन्हें कमाए गए पैसे के साथ वापस कर दिया जाएगा.


बाद में वेबसाइट ही हुई डिलीट

इसके बाद पीड़ित ने धीरे-धीरे टास्क पूरा करना शुरू किया और कमाए गए पैसे भी वेबसाइट के ई-वॉलेट में दिखने लगे. इसके बाद 3 दिसंबर तक पीड़ित ने कुल 37.80 लाख रुपये टास्क में इन्वेस्ट कर दिए और वेबसाइट में उन्हें कुल 41.50 लाख रुपये दिखाई देने लगा. बाद में टास्क पूरा करने के बाद पीड़ित ने ई-वॉलेट से पैसे निकालने के लिए रिक्वेस्ट डाला. लेकिन, रिक्वेस्ट पेंडिंग शो करने लगा. शख्स ने इस पर वेबसाइट को बार-बार चेक किया, लेकिन शख्स को बाद में पता चला कि ये वेबसाइट और टेलीग्राम चैनल दोनों ही डिलीट कर दिए गए हैं.


पीड़ित ने बाद में एक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की और आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करना) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D (कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करके धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया.


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