Monday, 19 December 2022

50 फीसदी लापता महिलाओं का सुराग नहीं, निर्भया फंड से मिला पैसा, मगर नहीं थम रही मानव तस्करी


देश में खासतौर पर महिलाओं की तस्करी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साल 2017 से 2021 के बीच देश में 1651809 महिलाएं गायब/लापता हुई थीं। इनमें से 866571 महिलाओं का पता लगाया जा सका है। मतलब, केंद्र एवं राज्यों की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियां 50 फीसदी लापता महिलाओं का सुराग नहीं लगा पा रही हैं। महिलाओं के गायब होने के मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जबकि पश्चिम बंगाल का दूसरा नंबर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू) को सुदृढ़ करने के लिए निर्भया फंड के अंतर्गत 98.96 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके बावजूद मानव तस्करी के मामलों की रफ्तार थम नहीं पा रही है। हाल ही में यह खबर सामने आई थी कि महाराष्ट्र में निर्भया फंड के तहत मिले 30 करोड़ रुपये से विधायकों के लिए वाहन खरीदे गए हैं।


पिछले पांच साल में गायब हुई हैं इतनी महिलाएं


साल 2017 के दौरान 18 वर्ष से अधिक आयु की 2,83,428 महिलाएं गायब हो गई थीं। इनमें से 15,359 महिलाओं का पता लगा लिया गया। 2018 में 3,06,733 महिलाएं गायब हुई थीं, जिनमें से 1,61,110 महिलाओं को ढूंढने में सफलता हाथ लगी। 2019 में विभिन्न राज्यों से 3,42,168 महिलाएं लापता हो गई थीं। इनमें से कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने 1,74,278 महिलाओं को खोज निकाला। 2020 में 3,44,422 महिलाएं लापता हुईं, जिनमें से 1,75,326 महिलाओं का पता लगा लिया गया। 2021 में 3,75,058 महिलाओं के गायब होने की सूचना मिली थी। इनमें से 2,02,298 महिलाओं को ढूंढने में सफलता मिली। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने संसद सत्र के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया, चूंकि संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत 'पुलिस और लोक व्यवस्था' राज्य सूची के विषय हैं। ऐसे में मानव तस्करी के अपराध को रोकने और उससे निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों की है।


'निर्भया निधि' के तहत मिले 98.96 करोड़ रुपये


गृह मंत्रालय ने मौजूदा मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू) को सुदृढ़ करने तथा राज्यों व संघ क्षेत्रों के सभी जिलों को कवर करते हुए नए एएचटीयू की स्थापना करने के लिए 2019-20 और 2020-21 के दौरान सभी राज्यों को 'निर्भया निधि' के तहत 98.96 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता प्रदान की है। एएचटीयू एकीकृत कार्यबल इकाइयां हैं, जिन्हें व्यक्तियों की तस्करी को रोकने और उससे निपटने तथा तस्करी के अपराध की जांच करने व अभियोजन चलाने का अधिदेश प्राप्त है। राज्यों और संघ राज्य प्रदेशों में कुल 768 एएचटीयू स्थापित किए गए हैं। मानव तस्करी के पीड़ितों को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों में एएचटीयू की स्थापना के लिए सीमा रक्षक बलों, जैसे बीएसएफ और एसएसबी को अनुदान सहायता भी प्रदान की गई है। बीएसएफ और एसएसबी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में क्रमश: 15 और 5 एएचटीयू स्थापित किए हैं।


पूर्वोत्तर राज्यों में मौजूद 42 आश्रय गृह ...


गृह मंत्रालय समय-समय पर 'न्यायिक वार्तालाप' और राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने के लिए राज्यों को वित्तीय मदद प्रदान करता है। इसका मकसद, न्यायिक और पुलिस अधिकारियों को मानव तस्करी से संबंधित कानूनों के नवीनतम प्रावधानों के बारे में अदृयतन जानकारी उपलब्ध कराना है। गृह राज्य मंत्री के मुताबिक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सूचित किया है कि नए अनुमोदित 'मिशन शक्ति' के तहत, तस्करी की रोकथाम के लिए कठिन परिस्थितियों में रह रही महिलाओं के लिए 'स्वाधारगृह और उज्जवला गृह' का आपस में विलय कर दिया गया है। इनका नाम बदलकर अब 'शक्ति सदन' हो गया है। यह एक एकीकृत राहत और पुनर्वास गृह है। पूर्वोत्तर राज्यों में 42 आश्रय गृह हैं। इनमें से असम में 19, मणिपुर में 22 और मिजोरम में एक आश्रय गृह शामिल है।


ली जा रही 'क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर' की मदद


इसके अलावा गृह मंत्रालय ने क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (क्राई-मैक), राष्ट्रीय स्तर का संचार प्लेटफार्म लांच किया है। इसके अंतर्गत देश में मानव तस्करी के मामलों सहित बड़े अपराधों संबंधी सूचना का सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के पुलिस अधिकारियों के बीच त्वरित (रियल टाइम) आधार पर प्रसार करने और उसे साझा करने की सुविधा भी प्रदान करता है। क्राई-मैक, विभिन्न अपराध से संबंधित कार्य को देख रहे पुलिस अधिकारियों के बीच अंतर-राज्जीय समन्वय में सक्षम बनाता है। गृह मंत्रालय, मानव तस्करी से संबंधित राज्य और संघ राज्य क्षेत्र के नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर काम करता है।


Lorem ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry.