Tuesday, 20 December 2022

इस राज्य में आज भी हो रहे बाल विवाह, 78 फीसदी महिलाएं टीनएज में ही बन जाती हैं मां

आंध्र प्रदेश में लगभग 78 प्रतिशत बाल वधुएं अपनी किशोरावस्था में मां बन जाती हैं. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में बाल विवाह की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन राज्य में बाल विवाह का प्रसार 29.3 प्रतिशत के बराबर है. आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में एक गैर सरकारी संगठन, चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) की एक स्टडी से इस बात का खुलासा हुआ है.


ये स्टडी रिपोर्ट हाल ही में यहां आयोजित एक स्टेट लेनल कंसल्टेशन में जारी की गई थी. CRY के क्षेत्रीय निदेशक जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि अध्ययन के लिए डेटा आंध्र प्रदेश के कुछ गांवों से इकट्ठा किया गया था.


बाल विवाह के बाद दो साल में दो बच्चे

CRY आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के वरिष्ठ प्रबंधक बडुगु चेन्नईयाह ने कहा कि स्टडी से पता चलता है कि 39 प्रतिशत बाल वधुओं के विवाह के बाद दो साल से कम समय में कम से कम दो बच्चे हैं. किशोरावस्था में महिलाओं ने कम वजन वाले शिशुओं को जन्म दिया. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक स्टडी से पता चलता है कि 52 फीसदी परिवारों ने एक प्रथा के रूप में बाल विवाह करवाया. शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह के मामले थे. स्टडी में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि 97 प्रतिशत बाल वधुओं की आयु 15 से 17 साल के बीच थी, बाकी की शादी 10 से 14 वर्ष की आयु के बीच हुई थी.


एपी राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एपीएससीपीसीआर) के अध्यक्ष केसली अप्पा राव ने स्टडी के तहत बाल विवाह के मुख्य कारणों में अशिक्षा, गरीबी, प्रवासन, माता-पिता के खराब स्वास्थ्य और टूटे परिवारों को पाया है. इसके अलावा गांवों में परिवहन सुविधाओं की कमी, वित्तीय समस्याएं, अंधविश्वास और सुरक्षा की कमी भी कम उम्र में विवाह के कुछ कारण थे.


पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन फॉर रूरल डेवलपमेंट (पीओआरडी) के निदेशक जे. ललितम्मा, जिन्होंने कंसल्टेशन में भाग लिया, ने कहा कि यह दयनीय है कि कुछ बाल वधुओं को उनके पतियों ने दो लड़कियों को जन्म देने के लिए छोड़ दिया


Lorem ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry.