Friday, 2 December 2022

सावधान! समेट लो सामान; मुंबई का मरीन ड्राइव डूबने वाला है!

आपने वो गाना तो सुना होगा, ‘एक अकेला इस शहर में…आशियाना ढूंढता है, आबोदाना ढूंढता है.’ इस गाने का एक बड़ा हिस्सा मुंबई के मरीन ड्राइव में फिल्माया गया था. लेकिन जल्दी ही लोग यहां ऑफिस ढूंढने या आशियाना ढूंढने सिर्फ फिल्मों में ही पाएंगे. हकीकत में यह ठिकाना अब ज्यादा दिनों तक कायम रहने वाला नहीं है. बहुत जल्दी ही मुंबई का मरीन ड्राइव या नरीमन प्वाइंट जैसे इलाके गायब हो जाएंगे. आप जब यहां आएंगे तो इस जगह सिर्फ पानी ही पानी पाएंगे. और ऐसा होने में कोई ज्यादा समय लगने वाला नहीं है. यह बस चंद सालों में ही हो जाएगा.


मुंबई के इन इलाकों की कम से कम 1000 इमारतें गायब हो जाएंगी. यहां रहने वालों को अपने घर छोड़ कर जाना पड़ेगा. कंपनियों को ऑफिस बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स या कहीं और शिफ्ट कर देना पड़ेगा. लगभग 25 किलोमीटर लंबाई की सड़क ध्वस्त हो जाएगी. 126 किलोमीटर लंबी सड़क पानी के नीचे आ जाएगी. जब हाई टाइड आएगा तो करीब 2500 इमारतों के अंदर पानी की झटास आ जाया करेगी.


तबाही आने वाली है, मुंबई डूब जाने वाली है

RMSI की रिसर्च में यह दावा किया गया है. RMSI की रिपोर्ट के मुताबिक हाजी अली दरगाह, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट, वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे, बांद्रा वर्ली सी लिंक, मरीन ड्राइव जैसे इलाके डूबने की स्थिति तक आ जाएंगे. RMSI ने यह एनालिसिस IPCC के छठे क्लाइमेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर किया है.


2030 से बदतर हो जाएंगे हालात, 2050 तक सब खल्लास

यह हालत सिर्फ मुंबई की नहीं, कोच्चि, मेंगलुरू चेन्नई, विशाखापट्टनम और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में भी होने वाली है. एक रिपोर्ट के मुताबिक 1874 से 2004 के बीच उत्त हिंद महासागर में हर साल 1.06 से 1.75 मिमी की रफ्तार से वाटर लेवल ऊपर हो रहा है. 1993 से 2017 तक की बात करें तो यह 3.3 मिमी की रेट से बढ़ रहा है. 1874 से 2005 के बीच हिंद महासागर करीब एक फुट ऊपर आया है. मौसम विभाग की मानें तो समुद्र का जलस्तर बढ़ने की सबसे अहम वजह ग्लोबल वॉर्मिंग है. इस वजह से गौर करें तो पाएंगे कि पश्चिमी तट पर पिछले चार सालों में चक्रवातीय तूफानों में 52 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.


एक भी अकेला इस शहर में आशियाना नहीं ढूंढ पाएगा…आबोदाना नहीं रह जाएगा

विशेषज्ञों का मानना है कि 2050 तक तापमान में 2 डिग्री सेल्शियस की बढ़ोत्तरी हो जाएगी. इससे साइक्लोन भी तीन गुना ज्यादा आया करेंगे. ऐसे में भारत के 12 शहरों में जल स्तर खतरनाक तेजी से ऊंचा उठेगा. एक अनुमान के मुताबिक यह भावनगर में 2.60 फुट बढ़ेगा, कोच्ची में 2.32 फुट ऊंचा उठेगा, मोरमुगाओ में 2.06 फुट, ओखा में 1.96 फुट, पारादीप में 1.93 फुट, मुंबई में 1.90 फुट तूतीकोरन में 1.93 फुट, चेन्नई में 1.87 फुट, विशाखापट्टनम में 1.77 फुट और मंगलुरू में 1.87 फुट ऊंचा उठ जाएगा. यह सब होने में 2050 से बहुत देर भी हुई तब भी साल 2100 तक तो हो ही जाएगा.


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