Thursday, 1 December 2022

एक्सपर्ट्स ने कहा- आफताब के 'कबूलनामे' की नहीं है कोई कानूनी वैधता

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के महरौली थाना क्षेत्र में हुए श्रद्धा वालकर हत्याकांड को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ और पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान कथित तौर पर आफताब ने श्रद्धा की हत्या और शव के टुकड़े फेंकने की बात कबूल की है। इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि आफताब पूनावाला के 'कबूलनामे' की कोई कानूनी वैधता नहीं है।


विशेषज्ञों ने बताया कि आफताब द्वारा कथित तौर पर मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों सहित रिपोर्ट किए गए "कबूलनामे" में निर्णायक कानूनी वैधता नहीं है। विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रक्रिया में कई प्रमुख शर्तों को पूरा नहीं किया गया था। हालांकि पुलिस और अन्य आधिकारिक सूत्रों ने दावा किया है कि पूनावाला ने अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वालकर की हत्या करने और उसके शरीर के टुकड़े करने की बात कबूल की है, लेकिन उसके वकील ने कहा है कि आफताब ने हत्या के कबूलनामे से इनकार किया था।


कानूनी विशेषज्ञों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए आफताब पूनावाला के कबूलनामे पर भी सवाल खड़े किए और इसे आपत्तिजनक और अभूतपूर्व करार दिया। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से समाचार रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पूनावाला ने श्रद्धा की हत्या करने, उसके शरीर को 35 टुकड़ों में काटने और उन्हें शहर के अलग-अलग इलाकों में फेंकने की बात कबूल की थी।


श्रद्धा मामले की जांच करने मुंबई गई दिल्ली पुलिस लौटी

वहीं, दूसरी ओर श्रद्धा वालकर की हत्या और उसके 35 टुकड़े किए जाने के मामले में जांच कर रही दिल्ली पुलिस मुंबई से लौट आई है। श्रद्धा की हत्या के मामले में जांच के लिए दिल्ली पुलिस 18 नवंबर से ही मुंबई में डेरा डाले हुए थी। फिलहाल वहां से जांच पूरी कर टीम वापस आ गई है। हालांकि मुंबई से दिल्ली पुलिस को कुछ खास साक्ष्य नहीं मिले।


पुलिस को श्रद्धा का मोबाइल भी नहीं मिला है। आरोपित आफताब पूनावाला ने तीन नवंबर को मीरा भायंदर क्रीक के पानी में श्रद्धा का मोबाइल फेंक दिया था। 18 नवंबर को दिल्ली पुलिस की चार सदस्यीय टीम मुंबई पहुंची थी और जांच शुरू की थी। वहां पुलिस श्रद्धा के मोबाइल के साथ ही अन्य साक्ष्यों की उम्मीद में गई थी लेकिन कुछ खास हाथ नहीं लगा।


दरअसल, श्रद्धा के मोबाइल से पुलिस को यह पता चल सकने की उम्मीद थी कि आफताब ने उसकी हत्या क्यों की। इन 12 दिनों में दिल्ली पुलिस ने लगभग 22 लोगों के बयान दर्ज किए जो श्रद्धा वालकर और आफताब पूनावाला से जुड़े थे। हालांकि पुलिस जांच में सिर्फ श्रद्धा के दोस्त लक्ष्मण नादर का बयान ही मददगार साबित हो सका है।

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