Wednesday, 28 December 2022

क्या महाराष्ट्र की सियासत में आएगा भूचाल? अजित पवार को CM शिंदे ने मुंबई बुलाने के लिए दिया सरकारी विमान

Maharashtra : महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजित पवार (Ajit Pawar) को सरकार ने नागपुर (Nagpur) से मुंबई (Mumbai) आने के लिए सरकारी विमान (Government Plane) उपलब्ध कराया है. हालांकि, अजित पवार की पहले से फ्लाइट की टिकट बुक थी लेकिन उन्हें मुंबई लाने के लिए सरकारी प्लेन भेजा गया है. इसकी वजह से महाराष्ट्र में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. अजित पवार दिलीप वात्से पाटिल के साथ बुधवार (28 दिसंबर) दोपहर करीब 1.30 बजे नागपुर से रवाना होंगे.


अजित पवार ने कहा कि बीएसी की बैठक बुधवार को पहले से तय थी. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख आज जेल से रिहा हो रहे हैं. उन्हें देशमुख से मिलने के लिए मुंबई जाना था. अजित पवार ने आगे कहा, "मुख्यमंत्री ने मुझे बीएससी की बैठक में शामिल होने के लिए कहा. साथ ही सीएम ने कहा कि वह मुझे और दिलीप वात्से पाटिल को सरकारी विमान उपलब्ध कराएंगे." उन्होंने आगे कहा, "चूंकि विपक्ष के नेता के रूप में मेरे पास एक कैबिनेट मंत्री की रैंक है और मैं इसका इस्तेमाल करने का हकदार हूं. मैं दोपहर डेढ़ बजे मुंबई जाऊंगा और फिर वापस भी आऊंगा."


अनिल देशमुख होंगे जेल से रिहा


बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख बुधवार (28 दिसंबर) को मुंबई की आर्थर रोड जेल से रिहा होंगे. अजित पवार मुंबई में उनसे मुलाकात कर सकते हैं. महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र इस समय नागपुर में जारी है. नेता प्रतिपक्ष अजित पवार शीतकालीन सत्र के लिए नागपुर में मौजूद हैं. वह आज दोपहर को नागपुर से मुंबई के लिए रवाना होंगे. महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें मुंबई जाने के लिए सरकारी विमान उपलब्ध कराया है. इसके बाद से ही महाराष्ट्र की सियासत में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं.



उद्धव ने राज्यपाल को नहीं दिया था सरकारी विमान


दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम को महाराष्ट्र की तत्कालीन महाविकास अघाड़ी गठबंधन सरकार के शासनकाल से जोड़ कर देखा जा रहा है. एमवीए के शासन के दौरान पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को सरकारी विमान से उत्तराखंड की यात्रा करने की इजाजत नहीं दी थी. हालांकि, उद्धव ठाकरे ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए राजभवन के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था. सीएमओ की ओर से अपना पक्ष रखते हुए कहा गया था कि राजभवन के अधिकारियों ने राज्यपाल को सूचित नहीं किया और उनकी यात्रा को लेकर पर्याप्त बंदोबस्त नहीं किए.

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