Wednesday, 28 December 2022

कोरोना लॉकडाउन के दौरान रास्ते में दिया था बच्चे को जन्म, अब महाराष्ट्र सरकार महिला को देगी एक लाख रुपये


मुंबई: लॉकडाउन में महाराष्ट्र से घर वापसी कर रही महिला ने रास्ते में बच्चे को जन्म दिया था। महाराष्ट्र सरकार को अब महिला को एक लाख रुपये का भुगतान करना होगा। यह निर्देश राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को दिया है। इसके पीछे समय पर चिकित्सा देखभाल प्रदान करने में विफल रहने का कारण बताया गया है। इस मामले में एनजीओ के जरिए एक अलर्ट के बाद एनएचआरसी ने संज्ञान लिया था। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश की रहने वाली महिला को मजबूरन घर वापसी करनी पड़ी जो कि अपने पति के साथ महाराष्ट्र में रह रही थी। महिला का पति कोविड लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र में काम कर रहा था। महिला ने 26 मई, 2020 को पिंपलगांव के रास्ते में एक बच्चे को जन्म दिया था। इस दौरान उसे किसी भी तरह की मेडिकल सुविधा नहीं मिली। बच्चे को जन्म देने के कुछ ही घंटों के आराम के बाद महिला ने वहां से बची 150 किमी घर की पैदल यात्रा फिर से शुरू कर दी।


महिला को दिए जाने वाले भुगतान को मंजूरी

एनएचआरसी के निर्देशों के बाद महिला को मिलने वाले भुगतान को मंजूरी मिल गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए 26 दिसंबर को मां शंकुतला कौल के लिए 50,000 रुपये और उसके नवजात बच्चे के लिए 50,000 रुपये के भुगतान को मंजूरी दी। एक आधिकारिक प्रस्ताव में कहा गया, 'जिला स्वास्थ्य अधिकारी, धुले के जरिए भुगतान जारी कर दिया गया है।' सार्वजनिक स्वास्थ्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव धुले के इनपुट के आधार पर एक रिपोर्ट 24 मई, 2022 को पेश की गई थी। इसमें कहा गया कि जिले में सड़कों पर किसी भी डिलीवरी के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।


सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने पेश किया था दावा

महिला वर्तमान में एमपी के सतना में रह रही है। महिला का कहना है कि पिंपलगांव के पास जंगल में उसकी सामान्य डिलीवरी हुई थी। साथ ही कहा कि उसके परिवार ने एम्बुलेंस या किसी भी स्वास्थ्य सुविधा के लिए टोल-फ्री नंबर पर संपर्क नहीं किया था। डीएचओ ने कहा, 'उसे मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों से आवश्यक टीकाकरण प्राप्त हुआ'। मिली जानकारी के मुताबिक सतना जिला प्रशासन ने महिला के परिवार को गृहनगर के लिए एक बस की व्यवस्था की और उसे 10,000 रुपये के अलावा रोगी कल्याण कोष से 1,000 रुपये और होम डिलीवरी के लिए 500 रुपये दिए। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने इस आधार पर कोई जुर्माना लगाने का अनुरोध किया था कि महिला ने महाराष्ट्र राज्य स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क नहीं किया था।

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