Wednesday, 30 November 2022

IAS तुकाराम मुंडे का फिर हुआ ट्रांसफर, 16 सालों में 19 बार, हद है यार!

एक बार फिर महाराष्ट्र मेंआईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे का तबादला कर दिया गया है. वे अब तक परिवार कल्याण विभाग के निदेशक के पद पर काम कर रहे थे और स्वास्थ्य विभाग में बेहतरी लाने की कोशिश कर रहे थे. वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रभारी थे. दो महीने पहले ही तबादला करके उन्हेंर भेजा गया था. दो महीने बाद एक बार फिर उनके हाथ तबादले का लेटर आ गया. पिछले 16 सालों में उनका 19 वां बार तबादला हुआ है. उनके अलावा पांच और अधिकारियों का तबादला किया गया है.


अनुशासनप्रियता तो उन्हें बेहद पसंद है. वे काम को कल पर ना छोड़ते हैं, ना अपने सहयोगियों और जूनियरों को ऐसा करने देते हैं. अनुशासन लाने के लिए और अराजक स्थितियों को पटरी पर लाने के लिए वे जो कदम उठाते हैं, वे कदम ही उनके तबादले की वजह बन जाते हैं. 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के ही बीड जिले के ताडसोना में जन्मे तुकाराम मुंढे 2005 बैच के आईएएस हैं.


जनता के बीच लोकप्रिय, नेताओं को पसंद नहीं कार्यशैली

तुकाराम मुंढे का तबादला तो कर दिया गया है, लेकिन उन्हें कोई पोस्टिंग नहीं दी गई है. अब तक पिछले 16 सालों में जिन-जिन 19 जगहों पर उनकी बदली हुई है, उन सभी जगहों में उन्होंने अपने कामों की छाप छोड़ी है. वे जहां भी काम करने गए, जनता में लोकप्रिय होते गए लेकिन जन नेताओं के बीच उनकी कार्यशैली कभी पसंद नहीं की गई. ऐसा नहीं, कि एक पार्टी के लोग उन्हें पसंद नहीं करते हों तो दूसरी पार्टी के लोगों को वे पसंद हों. नेताओं में उन्हें लेकर नापसंदगी एक समान भाव से कायम रही है, तभी तो 16 सालों में 19 बार उन्हें सामान पैक कर शहर छोड़ कर निकलना पड़ा है.


अब तक कब-कब, कहां-कहां, कैसे-कैसे काम किया?

उनके ट्रांसफर की बात जब-जब सामने आ जाती है. हर बात पर आपस में एक-दूसरे के विरोध में उतरने वाले पक्ष-विपक्ष एक हो जाते हैं. लेकिन इसके बावजूद मुंढे की धमक और चमक में कभी कोई बदलाव नहीं पाया गया, इसलिए आम जनता ने हमेशा उन्हें सर आंखों पर बैठाया. अगस्त 2005 में ट्रेनी उपजिलाधिकारी के तौर पर सोलापुर में रहे. सितंबर 2007 में उप जिलाधिकारी बन कर देगलूर उपविभाग में भेजे गए. जनवरी 2008 में नागपुर जिला परिषद के सीईओ बने. मार्च 2009 में आदिवासी विभाग के आयुक्त बने. जुलाई 2009 में वाशिम के सीईओ बने. जून 2010 में कल्याण के सीईओ बने. जून 2011 में जालना के जिलाधिकारी बने. सितंबर 2012 में वे मुंबई में बिक्रीकर सह आयुक्त बने.


इसी तरह नवंबर 2014 में सोलापुर के जिलाधिकारी बने. मई 2016 में वे नवी मुंबई महापालिका के आयुक्त बने. मार्च 2017 में वे पुणे के पीएमपीएल में मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने. फरवरी 2018 में नासिक महापालिका में वे आयुक्त बनाए गए. नवंबर 2018 में नियोजन विभाग के सह सचिव बनाए गए. दिसंबर 2018 में मुंबई एड्स नियंत्रण के प्रोजेक्ट ऑफिसर की जिम्मेदारी ली. जनवरी 2020 में वे नागपुर महापालिका के आयुक्त बने. अगस्त 2020 में उन्होंने महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण मुंबई में सदस्य सचिव की हैसियत से पदभार संभाला. जनवरी 2021 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में गए. सितंबर 2022 में वे स्वास्थ्य सेवा व संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान में आयुक्त पद की हैसियत से काम किया और अब 29 नवंबर 2022 को एक बार फिर उनका तबादला हो गया और पोस्टिंग भी अब तक तय नहीं की गई.

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