Wednesday, 23 November 2022

तेजस्वी यादव से मिलने मुंबई से पटना क्यों जा रहे हैं आदित्य ठाकरे?


मुंबई: तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) से मिलने के लिए आखिर पटना क्यों जा रहे हैं आदित्य ठाकरे? उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के पुत्र आदित्य ठाकरे के एक दिवसीय बिहार दौरे को लेकर महाराष्ट्र की सियासत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। साथ ही आदित्य ठाकरे एकनाथ शिंदे गुट (Eknath Shinde Faction) के निशाने पर आ चुके हैं। हालांकि, आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) बिहार क्यों जा रहे हैं इसके पीछे कोई आधिकारिक घोषणा या बयान अब तक ठाकरे गुट की तरफ से नहीं आया। लेकिन माना जा रहा है कि जिस तरह से आगामी बीएमसी (BMC) के चुनाव में उद्धव ठाकरे का गुट अलग-थलग पड़ता हुआ नजर आ रहा है। यह मुलाकात उस संदर्भ में भी हो सकती है। हालांकि, ठाकरे गुट की तरफ से बताया गया है कि यह एक सामान्य भेंट है।


आदित्य और तेजस्वी के मुलाकात की संभावित वजह

आने वाले कुछ महीनों में देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी के चुनाव होने हैं। बीएमसी में लगभग तीन दशकों से शिवसेना की सत्ता थी। हालांकि, अब शिवसेना का विभाजन होने के बाद उद्धव ठाकरे का का गुट काफी कमजोर हो चुका है। वहीं, बीजेपी ने भी यह प्रण लिया हुआ है कि वह इस बीएमसी के चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट को महानगरपालिका की सत्ता से उखाड़ फेकेंगे। दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी में उद्धव ठाकरे की सहयोगी कांग्रेस ने अकेले दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। जबकि एनसीपी का मुंबई शहर में कोई बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा है। ऐसे में उद्धव ठाकरे को यह लड़ाई खुद के दम पर लड़नी होगी। माना जा रहा है कि इसी मद्देनजर ठाकरे गुट अभी से मोर्चाबंदी में जुटा हुआ है।



क्या है बीएमसी चुनाव का गणित

बात जब मुंबई के बीएमसी चुनाव के आती है तो उत्तर भारतीय मतदाताओं की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इस बात को न सिर्फ उद्धव ठाकरे गुट बल्कि महाराष्ट्र में सियासत करने वाली हर पार्टी समझती है। इसी के मद्देनजर ठाकरे गुट अभी से चुनाव में अपनी जीत को पक्का करने के लिए तैयारियां शुरू कर चुका है। मुंबई में उत्तर भारतीय मतदाताओं की संख्या 40 से 45 लाख के बीच है। ऐसे में जिस तरफ उत्तर भारतीय मतदाता झुक जाएगा, उस पार्टी की जीत मुंबई महानगरपालिका चुनाव में तय मानी जाती है। शिवसेना के बीएमसी की सत्ता में अब तक काबिज रहने के पीछे एक बड़ी वजह उत्तर भारतीय मतदाताओं का उनके साथ जुड़े रहना भी हैं।


हालांकि, 2017 के चुनाव में बीजेपी ने शिवसेना (विभाजन के पहले) को जबरदस्त टक्कर दी थी। मुंबई में रहने वाला उत्तरभारतीय मतदाता मुख्यतः कांग्रेस, बीजेपी और शिवसेना के बीच में बंटा हुआ है। जिसमें से सबसे ज्यादा वोट फिलहाल शिवसेना और बीजेपी को उत्तर भारतीयों की तरफ से दिया जाता है। कांग्रेस को वोट न मिल पाने की एक वजह यह भी है कि मौजूदा हालात में मुंबई शहर में कांग्रेस के पास कोई बड़ा जमीनी नेता नहीं है। ऐसे में उत्तर भारतीय मतदाताओं के पास भी शिवसेना और बीजेपी के साथ जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता।


शिवसेना इस बात को अच्छे से जानते हैं कि अगर उसने अभी से उत्तर भारतीय मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित नहीं किया तो चुनाव के वक्त में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। शिवसेना न सिर्फ उत्तर भारतीय बल्कि गुजराती मतदाताओं को भी लुभाने की कोशिशों में जुटी हुई है। इसके लिए भी उसने बीच के दिनों में कुछ कार्यक्रम आयोजित किए थे। मुंबई गुजराती वोटरों को आम तौर पर बीजेपी का परंपरिक वोटर माना जाता है।


तीसरा मोर्चा के लिए प्रयास?

आदित्य ठाकरे और तेजस्वी यादव की मुलाकात को लेकर शिवेसना के एक नेता ने बताया कि यह मुलाकात संभावित थर्ड फ्रंट को लेकर भी है। जिस तरह से कुछ दिनों पहले देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि उद्धव ठाकरे ने पहले धोखा दिया था जिसका हमने सरकार गिरा कर बदला लिया है। उसके बाद यह माना जा रहा है कि तीसरे मोर्चे को लेकर उद्धव ठाकरे गुट काफी संजीदा है। इस मुलाकात को इस तरह से भी देखा जा रहा है कि जितने भी लोग बीजेपी के खिलाफ में है उन सभी को एकजुट करने की कोशिश में ठाकरे गुट लगा हुआ है। यह मुलाकात उसी कड़ी का हिस्सा है।


एकनाथ शिंदे गुट ने साधा निशाना

आदित्य ठाकरे के बिहार दौरे पर एकनाथ शिंदे गुट ने जमकर निशाना साधा है। शिंदे गुट के प्रवक्ता नरेश म्हस्के ने कहा कि जिन लोगों ने बालासाहेब का विरोध किया, जो लोग बालासाहेब के विरोध में थे। आज, उन्हीं से आदित्य ठाकरे उनके घर जाकर मुलाकात कर रहे हैं। आखिर उद्धव ठाकरे पर यह कैसी मुसीबत आ गई है, यह कैसी लाचारी है कि उन्हें उत्तर भारतीयों की सहानुभूति हासिल करने के लिए बिहार तक जाना पड़ रहा है। तेजस्वी यादव को खुद महाराष्ट्र में आकर आदित्य ठाकरे से मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली मिलने के लिए जाते हैं। तब विरोधी सीएम पर यह आरोप लगाते हैं कि वह दिल्ली के इशारे पर काम करते हैं। जबकि आदित्य ठाकरे तो एक राज्य के उप मुख्यमंत्री से मिलने के लिए जा रहे हैं।

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