Wednesday, 23 November 2022

महाराष्ट्र: कोरोना ने 90 फीसदी बच्चों से छीना पिता का साया, सबसे ज्यादा पुरुषों की हुई मौत


कोरोना का नाम सुनते ही लोगों के पांव थम जाते हैं. ये वो महामारी है जो दो साल से लगातार अपना आंतक मचाए हुए है, हालांकि अब कोरोना महामारी कमजोर होती नजर आ रही है, लेकिन पिछले दो सालों के दौरान लाखों लोगों की मौत हुई हैं, हजारों बच्चों के सिरों से उनके माता-पिता का सहारा उठ गया. कुछ तो ऐसे भी हैं जिनके घरों में बच्चों के अलावा कोई बचा ही नहीं. इस महामारी के दौरान देश में महाराष्ट्र एक ऐसा जिला रहा जहां सबसे ज्यादा लोग कोरोना से पीड़ित रहे. राज्य में जिन बच्चों के परिजनों की मौत हुई है, उनमें से 90 प्रतिशत ने अपने पिताओं को खोया है.


राज्य के महिला और बाल विकास विभाग के आंकड़े के मुताबिक मार्च 2020 में महामारी की शुरुआत के बाद से महाराष्ट्र में 28,938 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है. इन परिजनों में 2919 महिलाएं (मां) थीं और 25883 पुरुष (पिता) थे. वहीं 136 मामलों में एक ही परिवार के एक से ज्यादा बच्चों को अपने माता या पिता को खोना पड़ा है. इसके अलावा 851 ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने अपने माता और पिता दोनों को ही कोरोना महामारी के दौरान खो दिया है.


कोरोना ने ली महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा जाने

महाराष्ट्र में अब तक कोरोना वायरस के कारण 1,39,007 लाख मौतें हो चुकी हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है. मार्च, 2020 से लेकर अक्टूबर, 2021 तक राज्य में 1.39 लाख मौतें हुई थीं, जिनमें से 92,212 पुरुष और 46,779 महिलाएं थीं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार महाराष्ट्र के बाद केरल में 71,477 मौतें हुई हैं. जो देश में दूसरे नंबर पर है.


मुआवजा मिलने में हो रही परेशानी

महामारी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने मुआवजे का ऐलान किया है, लेकिन लोगों को यह राशि लेने में परेशानियां आ रही हैं. अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि कई विधवाओं को दस्तावेजों की कमी के चलते मुआवजा नहीं मिल पा रहा है. वहीं कई मामले ऐसे हैं, जहां कोरोना के कारण जान गंवाने वाले शख्स के परिजनों के अलावा उसकी पत्नी ने भी मुआवजे पर दावा किया है.


महाराष्ट्र ने कोरोना पीड़ितों के परिजनों के लिए 50 हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है. वहीं कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के खाते में सरकार पांच लाख रुपये जमा करवा रही है. इसके अलावा उन्हें 1125 रुपये मासिक भत्ता भी दिया जा रहा है. वहीं पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम के तहत केंद्र सरकार अनाथ बच्चों को 23 साल की उम्र पूरी करने पर उनके खाते में 10 लाख रुपये जमा कराएगी.


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