Friday, 28 October 2022

राज-शिंदे को साथ लाकर BMC इलेक्शन जीतने का मेगा प्लान, BJP के टारगेट ठाकरे गुट के मराठी वोट


गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा, दिल्ली का एमसीडी और मुंबई का बीएमसी– ये कुछ बड़े चुनाव हैं जो आने वाले दिनों में होने हैं. मुंबई महानगरपालिका की अहमियत किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं है. बीएमसी का सालाना बजट देश के आधे राज्यों के बजट से ज्यादा होता है. यह देश की सबसे अमीर महानगरपालिका है. यहां पिछले 25 सालों से शिवसेना की सत्ता है. ठाकरे गुट का सबसे मजबूत गढ़ मुंबई है. इस गढ़ को भेदना है तो बड़ी रणनीति की जरूरत है. एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे को साथ लाने का बीजेपी का मेगा प्लान तैयार है.


बीजेपी ने शिंदे गुट को मुंबई में अपने कोटे की सीटें राज ठाकरे के साथ शेयर करने की सलाह दी है. उत्तर भारतीय भारी तादाद में बीजेपी के सपोर्ट में वोट करते रहे हैं. ऐसे में बीजेपी के लिए यह सही नहीं है कि वह खुल कर राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस के साथ गठबंधन करे और अपनी सीटें उनके लिए कुर्बान करे. इसलिए बीजेपी राज ठाकरे के साथ खुलकर आने की बजाए गुप्त गठबंधन ही करना चाहती है.


मेगा प्लान ऑफ फडणवीस, शिंदे साझा करें राज से अपनी सीट

इसलिए जो जानकारियां सामने आ रही हैं, उनके मुताबिक बीजेपी शिंदे गुट के लिए करीब 85 से 95 सीटें छोड़ने जा रही है. बीजेपी का प्लान है कि शिंदे गुट राज ठाकरे के साथ गठबंधन करे और अपने हिस्से की सीटें राज ठाकरे की पार्टी के साथ शेयर करे. जहां राज ठाकरे की पार्टी की जड़ें मजबूत हैं वहां शिंदे गुट उनके लिए सीटें छोड़ दे.


BMC में हो अगला मेयर अपना, BJP का इस बार है सपना

मुख्यमंत्री बनने के बाद एकनाथ शिंदे की राज ठाकरे के साथ 4 बार मुलाकातें हो चुकी हैं. इस बार बीजेपी का लक्ष्य हर हाल में बीएमसी में अपना मेयर बनाना है. बीजेपी कार्यकर्ता काम पर जुट चुके हैं. दही हंडी हो, या गणेशोत्सव हो, या नवरात्रि हो या दिवाली- अपने-अपने क्षेत्रों और वार्डों में बीजेपी नेता लगातार कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. इस दौरान अलग-अलग वार्डों में बीजेपी अपना अंदरुनी सर्वे करवा रही है. जहां पकड़ कम नजर आ रही है, वहां सहयोगी उम्मीदवार को जितवा कर अपना सपोर्ट बेस बढ़ाने की तैयारी की जा रही है.


ठाकरे के सामने शिंदे गुट की दिक्कत- मुंबई नहीं, ठाणे उनकी हद

लेकिन उद्धव ठाकरे गुट के सामने शिंदे गुट की दिक्कत यह है कि 55 विधायकों में से 40 और 18 सांसदों में से 12 को साथ लाने के बावजूद वे ठाकरे के मुंबई गढ़ को नहीं भेद पाए हैं. एक कॉरपोरेटर श्वेता म्हात्रे को छोड़ दें, तो मुंबई में ठाकरे गुट के नेता और कार्यकर्ता उद्धव के साथ बने रहे हैं. शिंदे की पकड़ मुंबई से सटे ठाणे में है, मुंबई में तो वे खुद इस बार अपनी ताकत आजमाने में लगे हैं और अपमी जमीन तैयार करने की तैयारी में लगे हैं.


बीजेपी- शिंदे को राज ठाकरे से गठबंधन करके क्या मिलेगा?

मुंबई में मराठी मानूस आज एक तरह से अल्पसंख्यक बन चुका है. मुंबई में अब ज्यादातर लोग गैर मराठी हैं. मारवाड़ी, गुजराती, उत्तरभारतीय वोटरों पर बीजेपी की पकड़ मजबूत है. लेकिन मराठा होने के बावजूद मराठी मानूस ठाकरे की बजाए बड़ी तादाद में एकनाथ शिंदे का साथ देगा, इसका भरोसा कम है. बीजेपी की बात भी करें तो भले ही मुंबई बीजेपी अध्यक्ष आशिष शेलार खुद मराठा हैं. लेकिन उनकी छवि भी महाराष्ट्र और मराठा कॉज के लिए फाइट करने वाले नेता के तौर पर नहीं है, वे बीजेपी के नेता के तौर पर ज्यादा पहचाने जाते हैं.


ऐसे में कोई मराठी वोटों पर अपना असर रखता है तो वो राज ठाकरे हैं. वे निश्चित ही मराठी वोट बैंक में सेध लगा कर बीजेपी को फायदा पहुंचा सकते हैं. शिंदे गुट भी ‘एक से भले दो’ बनकर अपनी पार्टी की जमीन मुंबई में भी तैयार करने की उम्मीद लगा सकता है.


राज ठाकरे को बीजेपी-शिंदे का साथ देकर क्या मिलेगा?

राज ठाकरे की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उनके व्यक्तिगत करिश्मे और भाषण का जादू और असर तो काफी है. लेकिन उनकी पार्टी का संगठन मजबूत नहीं है. चुनाव जीतने का मैकेनिज्म नहीं है. अच्छे उम्मीदवार नहीं हैं जो जीतने का माद्दा रखते हों. ठाकरे के पास बीएमसी की 25 सालों से सत्ता है, यानी चुनाव लड़ने के लिए पैसा और अन्य संसाधन हैं, राज ठाकरे कभी सत्ता में आए ही नहीं. ऐसे में अगर उनके साथ बीजेपी और शिंदे गुट की ताकत जुड़ जाए तो उनका करिश्मा सिर्फ मैदानों में ही नहीं, मतपेटियों में भी दिखाई देगा और उन्हें कुछ सीटें जिताने में मददगार होगा.


जहां मजबूत, वहां फाइट करेंगे- जहां नहीं, वहां राज-शिंदे इक्वेशन राइट करेंगे

बीजेपी के इंटरनल सर्वे से जो बातें निकल कर सामने आई हैं, उनके मुताबिक कम से कम 40 सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी के उम्मीदवारों की जीत किसी भी तरह से मुमकिन नहीं लग रही है. ठाकरे गुट के साथ कांग्रेस और एनसीपी की ताकत होने की वजह से यानी महाविकास आघाड़ी की एकता मजबूत होने की वजह से बीजेपी की राह थोड़ी और मुश्किल है. ऐसे में बीजेपी का मेगा प्लान यही है कि जहां वह मजबूत है, वहां वो फाइट करेगी, जहां मजबूत नहीं, वहां शिंदे-राज का इक्वेशन राइट करेगी. बीएमसी में कमल खिलाने का यही बीजेपी का मेगा प्लान है, फिलहाल मैच ऑन है!

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