Thursday, 27 October 2022

आज की खास खबरमंत्रिमंडल विस्तार के नाम पर बेकरार विधायकों को साधने की कोशिश


महाराष्ट्र की इस सरकार को अस्तित्व में आए 100 दिन से ज्यादा हो गए हैं लेकिन स्थिरता व स्थायित्व नाम की चीज नहीं है. पहले तो केवल 2 लोगों मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की सरकार काफी दिनों तक रही. उसके बाद भी शपथ सिर्फ कैबिनेट मंत्रियों की हुई. इस दौरान आपसी खींचातानी और संवादहीनता की स्थिति बार-बार देखने को मिली. 


महाराष्ट्र की शानदार परंपरा रही है कि यहां मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ही सशक्त व प्रभावशाली रहते हैं. इस बार भी ऐसा डिप्टी सीएम ऐसा दमदार व्यक्ति है जो खुद राज्य का सीएम रह चुका है. इसलिए प्रशासन पर सरकार की पकड़ अच्छी है. समस्या यह है कि जो लोग बगावत कर शिंदे गुट में गए थे, उनका कहना है कि उनकी उद्धव ठाकरे के नेतृत्ववाली महाविकास आघाड़ी सरकार में सुनवाई नहीं हो रही थी. उनके चुनाव क्षेत्र का विकास नहीं हो रहा था. फायदा सिर्फ एनसीपी उठा रही थी.


शिवसेना के विद्रोही गुट को लगा कि नई शिंदे-फडणवीस सरकार में उनके दुख दूर होंगे और सुनवाई ज्यादा होगी. ऐसा कुछ उनकी नजर में होता नहीं दिख रहा है. जैसी शिकायत पहले बड़ी संख्या में विधायकों की पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार को लेकर थी, कुल मिलाकर वैसी ही शिकायत इस बार के वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बढ़ती जा रही है. 


दूसरा कारण यह भी है कि नई सरकार बनने के इतने समय बाद भी शिंदे गुट और निर्दलीयों को ऐसा लग रहा है मानो वे बीजेपी के हाथ की कठपुतली बन गए हैं. शिंदे गुट का हर व्यक्ति जो उनके साथ गया है, उसे मंत्री पद या सत्ता में सहभागिता चाहिए जबकि हर किसी को मंत्री बनाना या महामंडल देना संभव नहीं है. इसलिए मंत्रिमंडल विस्तार के लिए तारीख पे तारीख दी जा रही है. इस वजह से निर्दलीय और शिंदे समर्थक विधायक बुरी तरह नाराज हैं.


बीजेपी में भी हर्ष का वातावरण नहीं

बीजेपी विधायकों में भी हर्ष का वातावरण नहीं है. सरकार बनने पर भी अपना सीएम नहीं होने के कारण यह सरकार अपनी है, ऐसा बीजेपी कार्यकर्ताओं को महसूस नहीं हो रहा है इसलिए उनका उत्साह भी निगेटिव है. अपने गुट को शांत करने के चक्कर में शिंदे को बहुत सारी मर्यादाओं का उल्लंघन करना होगा किंतु ऐसा उल्लंघन देवेंद्र जैसे कद्दावर नेता के सरकार में रहते संभव नहीं होगा. 


इसकी वजह से सबकी अपनी-अपनी सीमाएं हो गई हैं. पिछले दिनों उद्धव गुट ने दावा किया कि शिंदे गुट के 22 विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. जानकारों का कहना है कि यह बात हवा-हवाई नहीं है. दोनों गुटों में ऐसी चीजें चल रही हैं. शिंदे गुट में कई ऐसे नेता हैं जो अपने को शिंदे से कम नहीं मानते.


सिर्फ ऊपर से ‘फील गुड’

आपसी रंजिश को थामने तथा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अपनी सीट बचाने के लिए हर नेता लगा हुआ है. ऊपर से भले ही ‘फील गुड’ का फैक्टर दिख रहा है लेकिन अंदर ही अंदर बड़े पैमाने पर उथल-पुथल मची हुई है. महामंडल का लॉलीपॉप कितने विधायक हजम कर पाएंगे? 


उसे देखते हुए इस सरकार की स्थिरता भविष्य में आंकी जा सकेगी. इतना ही नहीं, उद्धव ठाकरे और शरद पवार का डर बताकर विधायकों को रोका जा रहा है वह अस्त्र भी अब बेअसर होता जा रहा है. इस दौरान खबर है कि फडणवीस और शिंदे मिलकर शनिवार से राज्य का दौरा चालू करेंगे.

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