Tuesday, 18 October 2022

Maharashtra: महाराष्ट्र के कोल्हापुर में कर्नाटक भवन के निर्माण के प्रस्ताव पर विवाद, उद्धव गुट ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में एक मठ के स्वामित्व वाली भूमि पर कर्नाटक भवन के प्रस्तावित निर्माण ने दोनों राज्यों के लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को फिर से जन्म दे दिया है। उद्धव ठाकरे गुट के स्थानीय पदाधिकारी कर्नाटक सरकार के इस कदम का जमकर विरोध कर रहे हैं। बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कोल्हापुर जिले के सिद्धगिरी में लिंगायत कनेरी मठ के परिसर में कर्नाटक भवन की आधारशिला रखी थी। बोम्मई ने इस निर्माण को जल्द से जल्द पूरा करने का भरोसा दिया था। लेकिन अब विरोध होने के बाद निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है।


कर्नाटक में मराठियों से भेदभाव हो रहा: संजय पवार

पत्रकारों से बात करते हुए उद्धव गुट के जिला प्रमुख, संजय पवार ने कहा कि कर्नाटक में मराठी लोग सरकारी अधिसूचनाओं द्वारा कन्नड़ के उपयोग को अनिवार्य करने के प्रशासन के कदम के कारण परेशानियों का सामना करते हैं।


कर्नाटक सरकार ने केवल कन्नड़ में व्यावसायिक रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया है। मराठी को परोक्ष रूप से कन्नर भाषा सीखने के लिए मजबूर किया जाता है। कर्नाटक में मराठियों पर अत्याचार हो रहा है, यही वजह है कि पार्टी ने इस मामले पर आक्रामक तरीके से निपटने का फैसला किया है।


सीमा विवाद का केंद्र रहा है कोल्हापुर

बता दें कि कोल्हापुर जिला कर्नाटक में बेलगावी से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो 1956 से सीमा विवाद के केंद्र में रहा है। इन क्षेत्रों में मराठी भाषी लोग महाराष्ट्र में शामिल होने का विरोध कर रहे हैं। इन सभी लोगों ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक सरकार उनके आंदोलन को दबाने और उन पर कन्नड़ भाषा थोपने की जबरन कोशिश कर रही है। 


कर्नाटक के मंत्री ने दिया संजय पवार को जवाब

शिवसेना गुट की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के मंत्री आर अशोक ने कहा कि जिस भूमि पर भवन है उसका निर्माण मठ के निजी स्वामित्व में किया जाना प्रस्तावित है। इसलिए निर्माण नहीं रुकेगा। उद्धव गुट की 'विध्वंस' की परोक्ष धमकी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अशोक ने कहा कि संजय पवार को याद रखना चाहिए कि कर्नाटक में छत्रपति शिवाजी की दर्जनों मूर्तियां हैं। कर्नाटक में शिवाजी की मूर्तियों की स्थापना के दौरान किसी भी कन्नड़ ने विरोध नहीं किया। आशा है कि आप समझ गए होंगे कि हमारा क्या मतलब है।

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