Saturday, 15 October 2022

शिवसेना के चुनाव चिन्ह पर खड़ा हो गया विवाद


महाराष्ट्र में शिवसेना में बगावत कर राज्य के मुख्यमंत्री बने एकनाथ शिंदे ने शिवसेना पर अपना दावा ठोंका था। वहीं शिवसेना पर पूर्व मुख्यमंत्री तथा बाला साहेब ठाकरे के पुत्र उद्वव ठाकरे भी अपना दावा ठोंक रहे हैं। दोनों के बीच की लड़ाई पहले सुप्रीम कोर्ट फिर बाद में चुनाव आयोग पहुंची। बीते 10 अक्टूबर को चुनाव आयोग के आये अंतरिम फैसले में उद्वव गुट को जलती हुई मशाल चुनाव चिन्ह तथा शिवसेना उद्वव बाला साहब ठाकरे नाम दिया गया। जबकि एकनाथ शिंदे गुट को चुनाव चिन्ह ढाल से लगी दो तलवारें तथा बाला साहब बांचे शिवसेना (यानि बाला साहब की शिवसेना) नाम दिया गया। अब उद्वव गुट को मिले चुनाव चिन्ह पर समता पार्टी ने अपना दावा ठोंका है।  समता पार्टी के मीडिया प्रभारी आशीष चौधरी ने बताया कि 1996 से समता पार्टी जलती हुई मशाल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय मंडल ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए आयोग को पत्र लिखा है। लेकिन आयोग से कोई संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं मिला है। उद्वव गुट को दिये गये चुनाव चिन्ह पर सवाल उठाते हुए उदय मंडल ने कहा है कि बड़ी राजनैतिक पार्टियों के दबाव में चुनाव आयोग छोटी पार्टियों को खत्म कर रहा है। छोटे व क्षेत्रीय दलों से बड़ी पार्टियों को नुकसान पहुंचता है। कई राज्यों में समता पार्टी सक्रिय है और चुनाव की तैयारी कर रही है ऐसे में चुनाव आयोग का फैसला एक साजिश है। इससे लोकतंत्र को खतरा है।


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