Saturday, 8 October 2022

कांग्रेस प्रतिनिधियों से वोट मांगने मुंबई पहुंचे खड़गे, रविवार को आएंगे थरुर

मुंबई: बाईस साल बाद हो रहे कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए मैदान में उतरे दोनों उम्मीदवारों में से एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अपने चुनाव प्रचार के लिए शुक्रवार को मुंबई पहुंचे जबकि दूसरे उम्मीदवार शशी थरुर रविवार को मुंबई पहुंच रहे हैं। थरुर के स्वागत के लिए मुंबई में कई जगहों पर होर्डिंग बैनर लगाए। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में इस बार गांधी परिवार का कोई सदस्य मैदान में नहीं है। आगामी 17 अक्टूबर को होने वाले मतदान में महाराष्ट्र से 560 प्रदेश प्रतिनिधि (पीसीसी डेलिगेट) अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। खड़गे इसके पहले महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी भी रह चुके हैं। उनके राज्य के कांग्रेस नेताओं से अच्छे संबंध हैं। इस लिए थरुर के मुकाबले खड़गे का महाराष्ट्र में पलड़ा भारी रहेगा। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में खड़गे से मिलने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता पहुंचे। प्रदेश कांग्रेस के एक पदाधिकारी कहते हैं कि थरुर छुट्टी के दिन रविवार को मुंबई आ रहे हैं इस लिए बहुत कम पीसीसी डेलिगेट उनसे मिल सकेंगे। इस बीच प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में खड़गे ने कहा कि सोनिया गांधी ने पहले ही साफ कर दिया था कि मेरे परिवार को काई सदस्य कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव नहीं लडेगा। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए कहा। खड़गे ने कहा कि मैं सभी को साथ लेकर चलूंगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह घर का चुनाव है। हम घर जोड़ने निकले हैं।    


तब प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में छा गया था सन्नाटा


22 साल पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष चुनने के लिए मतदान की नौबत आई थी और तब भी इस पद के लिए चुनाव के लिए दो उम्मीदवार मैदान में थे पर तब और अब में बड़ा फर्क यह है कि तब कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के उम्मीदवारों में सोनिया गांधी शामिल थी जबकि उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता जीतेंद्र प्रसाद उनके मुकाबाले चुनाव मैदान में उतरे थे। शुक्रवार को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार खरगे का स्वागत करने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले, कांग्रेस विधायक दल के नेता बाला साहेब थोरात सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता मौजूद थे। पर वर्ष 2000 में जब सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाल लड़ रहे जीतेंद्र प्रसाद कांग्रेस के पीसीसी डेलिगेटस से वोट मांगने दादर स्थित प्रदेश कांग्रेस तिलक भवन पहुंचे तो प्रदेश कांग्रेस का एक कमरा छोड़ कर सभी पर ताले लटके हुए थे। पूरे कार्यालय में जीतेंद्र प्रसाद का स्वागत करने के लिए कोई नेता-कार्यकर्ता मौजूद नहीं था। उस वक्त जीतेंद्र प्रसाद प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर लटके ताले को प्रणाम कर बैरंग वापस लौट गए थे। उस चुनाव में जीतेंद्र प्रसाद के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रदेश प्रतिनिधि में एक पीसीसी मेंबर महाराष्ट्र के थे जिनका नाम रत्नेश सिंह था। मूल रुप से उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले रत्नेश सिंह सोनिया गांधी के  खिलाफ चुनाव लड़ रहे जीतेंद्र प्रसाद के समर्थन का साहस कर अचानक राज्य की राजनीति में चर्चा में आ गए थे। पर सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने के बाद रत्नेश सिंह को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। इस चुनाव के थोडे समय बाद जीतेंद्र प्रसाद का निधन हो गया और रत्नेश सिंह को पार्टी में हासिए पर डाल दिया गया। सिंह आज भी कांग्रेस के कट्टर समर्थक हैं। पार्टी में भारी उपेक्षा के बावजूद सिंह ने कभी कांग्रेस छोड़ कर किसी अन्य दल में शामिल होने की नहीं सोची। सिंह कहते हैं कि मुझे अपनी पार्टी से कोई शिकायत नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष के लिए हो रहा चुनाव यह साबित करता है कि कांग्रेस पार्टी में ही लोकतंत्र है।  


   

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