Tuesday, 18 October 2022

Mumbai : हादसा हो या आत्महत्या...मुंबई में मरने के लिए सॉफ्ट स्पॉट बनी लोकल ट्रेनें


मुंबई: आर्थिक राजधानी मुंबई मेंपटरी पार करते हुए लोकल ट्रेन की चपेट में आने या लोकल के आगे कूद कर आत्महत्या करने के मामले बढ़ने लगे हैं। मुंबई उपनगरीय रेलवे नेटवर्क पर इस तरह की घटनाओं से जनहानि तो होती ही है, साथ ही ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित होता है। पिछले साल जनवरी से दिसंबर 2021 तक मुंबई डिविजन में 57 लोगों ने ट्रेनों के आगे कूदकर अपनी जान दे दी। जीआरपी से प्राप्त इन आंकड़ों में मध्य और पश्चिम रेलवे की घटनाओं को शामिल किया गया है। इस साल सितंबर तक 56 लोग आत्महत्या कर चुके हैं।


एक अधिकारी ने बताया है कि आमतौर पर पटरी पार करने की घटनाओं को अलग से दर्ज किया जाता है और हो सकता है इनमें से कुछ मामले आत्महत्या के भी हों। पिछले साल पटरी पार करते हुए ट्रेनों की चपेट में आकर 1114 लोगों की मौत हो गई, जबकि इस साल सितंबर तक 848 लोग शिकार हो चुके हैं।


जीवन रक्षक आरपीएफ

कई बार रेलवे की ओर से जारी विडियो में आत्महत्या का प्रयास करते शख्स को सुरक्षाकर्मी बचाते दिखाई देते हैं। इसके अलावा स्टेशन पर तैनात आरपीएफ के जवान यात्रियों की जान बचाते हैं। इस साल मुंबई डिविजन में पश्चिम रेलवे ने 23 लोगों की, जबकि मध्य रेलवे ने 24 लोगों की जान बचाई है।


ट्रेन भी चलाते हैं, जान भी बचाते हैं

प्लैटफॉर्म पर तैनात अलर्ट सुरक्षाकर्मियों के अलावा अलर्ट मोटरमेन भी कई बार लोगों की जान बचाने में कामयाब हुए हैं। मध्य रेलवे पर अप्रैल से अगस्त तक मोटरमेन ने 12 लोगों की जान बचाई हैं। इनमें से 4 मामले केवल अगस्त के थे। अधिकांश मामलों में पटरी पर लेटे शख्स को देखकर अलर्ट मोटरमैन ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया है।


खुदकुशी करने की कोशिश करने वालों की जान बचाकर नि:संदेह रेलवे ने बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन ऐसे कई और लोगों की जान बचाने में वह असमर्थ भी रही। हर व्यक्ति की जान बेशकीमती है। इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि रेलवे की पटरी पर कोई व्यक्ति किसी भी तरह से जान न गवाएं। यह काम मुश्किल है, बस इरादे और सतर्कता की जरूरत है।

Lorem ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry.