Thursday, 13 October 2022

Mumbai: वन विभाग ने बिछड़े हुए मां-बेटे को मिलाया, मादा तेंदुआ इस तरह से हुई थी अपने बच्‍चे से अलग


मुंबई: वन विभाग के अधिकारियों ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान को सफलतापूर्वक उसके अंजाम तक पहुंचाते हुए एक मादा तेंदुए को उसके बच्‍चे से मिला दिया है। यह वाक्‍या मुंबई के गोरेगांव ईस्‍ट (Goregaon East) में स्थित फिल्‍म सिटी (Film City) का है।


इस मादा तेंदुए की पहचान सी33-डेल्‍टा (C33-Delta) के रूप में हुई है, जिसके गले में ट्रैकिंग डिवाइस से लैस एक पट्टा बांधकर पिछले साल छोड़ दिया गया था ताकि जीपीएस तकनीक की मदद से उसकी लगातार ट्रैकिंग होती रहे।


मादा तेंदुआ सी33 संजय गांधी नेशनल पार्क (Sanjay Gandhi National Park) और आरे मिल्‍क कालोनी (Aarey Milk Colony) के बीच ही घूमती-फिरती रहती है, लेकिन उसका मिलना न के बराबर है क्‍योंकि इंसानों के नजदीक आना उसे पसंद नहीं। 


जंगल में पड़ा मिला था नन्‍हा तेंदुआ

दरअसल, 10 अक्‍टूबर को जल्‍द सुबह सुरक्षा कर्मियों को संजय गांधी नेशनल पार्क की सीमा से 100 मीटर की दूरी पर तेंदुए का एक छोटा सा बच्‍चा मिला। उन्‍होंने इसे वन विभाग को सौंप दिया। अधिकारियों ने उस नन्‍हें से बच्‍चे को एसएनजीपी पशु चिकित्‍सालय में भेजा।


मां से मिलाने के प्रयास में मिल रही थी नाकामयाबी

इसी दिन शाम से वन विभाग के कर्मी बच्‍चे को उसकी मां से मिलाने के लिए प्रयासरत थे। लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। बच्‍चे को एक पिंजरे में भरकर जंगल के बीचोंबीच रखा गया था।


चूंकि मादा तेंदुए के गले में जीपीएस ट्रैकर पट्टा था इसलिए सीसीटीवी कैमरे में उसे इधर-उधर घूमते हुए तो देखा जा सकता था, लेकिन उसे पिंजरे के पास लाना मुमकिन नहीं हो रहा था।


आखिरकार मां की पड़ी बच्‍चे पर नजर

11 अक्‍टूबर को भी यह प्रसास जारी रहा। पिंजरे को जिस जगह पर रखा गया था उसके आसपास पूरी की पूरी टीम छिपकर तैनात रही। चारों ओर कैमरे लगाए गए। लेकिन इस दिन भी मां अपने बच्‍चे के पास नहीं आ सकी।


अगले दिन तड़के पौने चार बजे मादा तेंदुआ पिंजरे के पास आई।


मां के बच्‍चे के नजदीक आते ही वन विभाग के कर्मियों ने रस्‍सी से पिंजरे के दरवाजे को खोल दिया और बच्‍चा दौड़कर अपनी मां से आकर लिपट गया। मां भी इतने दिन बाद अपने बच्‍चे से मिलकर उसे दुलारती रही, फिर महज चंद मिनटों में उसे लेकर जंगल में गायब हो गई।


आरे कालोनी में हमले के बाद पकड़ में आई थी सी33

दरअसल, साल 2021 में आरे कालोनी में इंसानों की बस्‍ती में तेंदुए के लगातार हमले का पता चला था। इसके बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए जाल बिछाया, जिसमें मादा तेंदुआ सी33 डेल्‍टा आकर फंस गई। लेकिन उसके पकड़े जाने के बाद भी हमले का सिलसिला जब बंद नहीं हुआ, तो पता चला कि सी33 डेल्‍टा बेकसूर है, उसका इन हमलों में कोई हाथ नहीं है।


बाद में वन विभाग की टीम ने उसके गले में ट्रैकर कालर पहनाकर उसे रिहा कर कर दिया। बता दें कि हमले का दौर उस वक्‍त खत्‍म हुआ था जब मादा तेंदुआ सी32 वन विभाग के लगाए पिंजरे में कैद हुई थी यानि कि हमलों के लिए असली जिम्‍मेदार वही थी।

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