Friday, 14 October 2022

'...तो आज भी महाराष्ट्र के CM रहते'; कैसे बच सकती थी उद्धव की कुर्सी, अजीत पवार ने बताया वह फॉर्मूला


मुंबई: एनसीपी यानी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजीत पवार ने गुरुवार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से कहा कि अगर शिवसेना के भीतर बगावत और सियासी संकट के दौरान उद्धव ठाकरे ने छगन भुजबल की मदद ली होती, तो वह आज भी मुख्यमंत्री होते. महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार ने कहा, ‘जब शिवसेना के 15 विधायकों ने पार्टी से बगावत की थी, तब उद्धव ठाकरे को एनसीपी नेता छगन भुजबल की मदद लेनी चाहिए थी. वह ऐसे राजनीतिक परिदृश्यों के मास्टर हैं. अगर आपने उनसे संपर्क किया होता, तो आप अभी भी महाराष्ट्र के सीएम होते’


वहीं, शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने शिवसेना नहीं छोड़ी होती तो वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए होते. उद्धव ठाकरे और अजीत पवार ने छगन भुजबल के 75वें जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये बातें कहीं. कार्यक्रम में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के गठबंधन महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के कई नेताओं ने शिरकत की. नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस के नेता बालासाहेब थोराट भी कार्यक्रम में शरीक हुए.


उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘अब मैं ऐसा व्यक्ति बन गया हूं, जिसे कोई झटका नहीं लगता. लेकिन जब भुजबल ने शिवसेना छोड़ी थी, तो मैं स्वीकार करता हूं कि हमारा परिवार स्तब्ध रह गया था. वह गुस्सा (जो उस समय निकला) राजनीतिक था. हम लंबे समय तक इस बात को पचा नहीं पाए कि हमारे परिवार का एक सदस्य हमें छोड़कर चला गया है.’


इससे पहले, महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार ने एनसीपी के गठन में भुजबल की भूमिका को याद किया और बताया कि कैसे उन्होंने 2002 में संकट में घिरी विलासराव देशमुख की सरकार को बचाने में अहम किरदार अदा किया था. अजीत पवार ने कहा, ‘यदि उद्धव ठाकरे ने (हालिया संकट के दौरान जिसके चलते एमवीए सरकार गिर गई) भुजबल की मदद ली होती, तो वह आज भी मुख्यमंत्री होते.’


अजीत पवार ने कहा कि 1999 में राकांपा का गठन होने के महज चार महीने बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हो गए. अगर पार्टी के पास और समय होता तो यह और सीटें जीत सकती थी और भुजबल मुख्यमंत्री बनते. इस पर ठाकरे ने कहा कि अगर भुजबल शिवसेना न छोड़ते तो उससे बहुत पहले ही मुख्यमंत्री बन गए होते. बता दें कि एक समय शिवसेना के तेजतर्रार नेता रहे भुजबल ने 1990 में बाल ठाकरे की पार्टी शिवसेना छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था. इसके बाद जब पवार ने राकांपा का गठन किया, तो वह उनके साथ चले गए.


Lorem ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry.