Sunday, 23 October 2022

महाराष्ट्र : दहेज हत्या मामले में अदालत ने महिला के पति, सास और ननद को बरी किया

ठाणे: महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अदालत ने दहेज के लिए क्रूरता बरतने और पत्नी की हत्या के मामले में उसके 37 वर्षीय पति, उसकी मां और बहन को बरी कर दिया।


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.एम. गुप्ता ने 20 अक्टूबर को पारित आदेश में अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए कहा कि अभियोजन उनके खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा है। इस आदेश की प्रति शनिवार को उपलब्ध कराई गई।


अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि महिला ने फरवरी 2012 में यहां एक शख्स से विवाह किया था और वह ठाणे के भिवंडी कस्बे में अपने ससुराल वालों के साथ रहती थी।


कुछ दिनों के बाद, ससुराल पक्ष ने पीड़िता को उसके माता-पिता से पैसे लेने के लिए मजबूर किया और मना करने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उस व्यक्ति ने महिला को तलाक की धमकी दी।


अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि उत्पीड़न के बाद, महिला ने अप्रैल 2015 में आत्महत्या कर ली।


बाद में उसके पति, 80 साल की सास और ननद (35) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304बी (दहेज-हत्या), 498ए (पति या उसके रिश्तेदार द्वारा महिला पर अत्याचार), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।


अपने आदेश में, न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने मृतक के भाई और पिता की जांच की, जिन्होंने बयान दिया कि शादी के बाद उसकी बहन और आरोपी के बीच घरेलू मुद्दों पर एक या दो मौकों पर विवाद हुआ था, लेकिन इसे सौहार्दपूर्ण ढंग से हल किया गया था।


मृतक के पिता ने यह भी कहा कि महिला को जल्दी गुस्सा आ जाता था, शायद इसलिए उसने आत्महत्या की होगी। अदालत ने कहा कि उक्त गवाह मृतक के भाई और पिता हैं, इसलिए उनके बयान इस मामले में प्रासंगिक हैं। हालांकि, उन्होंने अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया है।


इस प्रकार, अदालत ने कहा कि अभियुक्तों ने दहेज या धन की अपनी अवैध मांग को पूरा करने के लिए महिला के साथ क्रूरता की थी, इस बात का कोई सबूत नहीं है।


अदालत ने कहा कि यह भी साबित नहीं हुआ कि आरोपी व्यक्तियों ने महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जिसके कारण उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।


अदालत ने कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि आरोपी व्यक्तियों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी और 498ए के तहत अपराध किया था।

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