Monday, 10 October 2022

Bharat Jodo Yatra: महाराष्ट्र पहुंचने पर भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत कर सकते हैं शरद पवार

कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा जारी है और राहुल गांधी यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं। भारत जोड़ो यात्रा अभी कर्नाटक में है। भारत जोड़ो यात्रा का आज 33वां दिन है। वहीं राहुल गांधी ने जब आज सुबह भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की, इस दौरान उनके साथ हजारों कार्यकर्ता और नेता पैदल चलते हुए दिखाई दिए और उनके समर्थन में नारेबाजी की। भारत जोड़ो यात्रा को दक्षिण में मिल रहे समर्थन से पूरे देश के कांग्रेस कार्यकर्ता उत्साहित हैं।


आने वाले समय में भारत जोड़ो यात्रा कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र में पहुंचेगी। इसी बीच एक खबर आ रही है कि महाराष्ट्र में भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत एनसीपी प्रमुख शरद पवार करेंगे। समाचार एजेंसी एएनआई ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार भारत जोड़ो यात्रा के महाराष्ट्र पहुंचने पर उसका स्वागत करेंगे। हालांकि अभी तक इस पर किसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


बताया जाता है कि विपक्षी एकता के लिहाज से शरद पवार भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत कर सकते हैं और विपक्षी एकता को लेकर एक मजबूत संदेश भी दे सकते हैं। बता दें कि नीतीश कुमार भी विपक्ष के नेताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं और इस क्रम में पिछले महीने उन्होंने दिल्ली में विपक्ष के नेताओं से मुलाकात की थी। डेढ़ साल बाद लोकसभा चुनाव है और अगर शरद पवार भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत करते हैं तो आने वाले लोकसभा चुनाव में कुछ नए समीकरण दिखाई दे सकते हैं।


रविवार को आरजेडी का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू हुआ और इस अधिवेशन में भी विपक्षी एकता पर चर्चा की गई और प्रस्ताव पारित हुआ। आरजेडी का मानना है कि अगर आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए समान विचारधारा वाले दल एकजुट हो जाएं तो बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।


बता दें कि भारत जोड़ो यात्रा के 1 महीने पूरे हो चुके हैं। यात्रा के एक महीने पूरे होने पर शनिवार को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था। उस दौरान उन्होंने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने बीजेपी को फासीवादी पार्टी करार दिया था और कहा था कि देश के लिए आजादी की लड़ाई में बीजेपी और आरएसएस का कोई योगदान नहीं था। उन्होंने कहा था कि आरएसएस के लोग अंग्रेजों से मिले हुए थे और सावरकर को अंग्रेजों से स्टाइपेंड मिलता था।


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