Thursday, 22 September 2022

उद्धव का शाह को चैलेंज...BMC चुनाव BJP के लिए कितनी बड़ी चुनौती? समझिए नए समीकरण


मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में आने वाले दिनों में कई महानगर पालिकाओं के चुनाव होने हैं। जिसमें प्रमुख रूप से देश की सबसे अमीर महानगर पालिका बीएमसी (BMC) का चुनाव है। इस चुनाव को विधानसभा के सेमी फाइनल के रूप में भी देखा जा रहा है। इस चुनाव की तैयारियों में राज्य हर दल जुट गया है। खुद केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने भी मुंबई दौरे के दौरान बीएमसी चुनाव को लेकर बैठक की थी। तब उन्होंने यह भी कहा था कि एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) का गुट ही असली शिवसेना है। बीएमसी चुनाव के लिए भले ही असली लड़ाई बीजेपी (BJP) और पुरानी शिवसेना (Shivsena) के बीच हो लेकिन इसमें एकनाथ शिंदे का गुट का रोल भी अहम रहने वाला है। इसी चुनाव के लिए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने बुधवार को गोरेगांव नेस्को मैदान से एक अमित शाह (Amit Shah) को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि अ'गर हिम्मत है तो मुंबई जीतकर दिखाओ'। उद्धव के इस चैलेंज के बाद राज्य का सियासी पारा भी गर्म हो गया है। पिछली बार के बीएमसी चुनाव में लड़ाई शिवसेना और उसके पुराने सहयोगी बीजेपी के बीच में थी। जिसमें कांटे की टक्कर हुई थी। तब शिवसेना 84 सीटों के साथ बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। जबकि 82 सीटों के साथ बीजेपी दूसरी बड़ी पार्टी बनी थी। तब और अब के चुनाव में दोनों मुख्य प्रतिद्वंदी(शिवसेना- बीजेपी) और मुंबई बीजेपी अध्यक्ष आशीष शेलार कॉमन हैं। आइये समझते हैं कि उद्धव ठाकरे की अमित शाह को दी गयी चुनौती के क्या सियासी मायने हैं।


ठाकरे गुट पुरानी शिवसेना बन रहा है

उद्धव ठाकरे के आक्रामक रवैये के बारे में वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार सचिन परब ने बताया कि फिलहाल पुरानी शिवसेना के पास अपने पुराने रूप में जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प बचा नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले शिवसेना अपने आक्रामक रवैया के लिए ही जानी जाती थी। जो उद्धव ठाकरे के कार्यकाल के दौरान थोड़ी सौम्य हो गई थी। अगर आप बीते कुछ दिनों में हुई घटनाओं पर नजर डालेंगे तो आपको पता चलेगा कि अब उद्धव ठाकरे अपने शिव सैनिकों को आक्रमक प्रदर्शन करने से रोक नहीं रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण दादर इलाके में एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट के बीच हुई झड़प का मुद्दा है। जहां गणपति विसर्जन के दिन दोनों ही पक्ष एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए थे। उस दौरान शिंदे गुट के विधायक सदा सरवणकर ने हवाई फायरिंग भी की थी। इसी तरह से ठाणे शहर में भी शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के आमने सामने की खबरें आती रहती हैं। हालांकि अब शिवसेना भी पुराने रूप में वापस आती हुई नजर आ रही है।


बीजेपी- शिंदे से शिवसेना को कितना खतरा

सचिन परब ने बताया कि एकनाथ शिंदे और बीजेपी की जोड़ी की वजह से उद्धव ठाकरे गुट को बीएमसी चुनाव में काफी दिक्कतें आ सकती हैं। फिर भी अगर जल्द चुनाव करवाए जाते हैं तो ठाकरे को लोगों की सहानुभूति का कुछ हद तक फायदा मिल सकता है। बावजूद इसके बीजेपी देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे शिवसेना की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। परब ने बताया कि साल 2017 के चुनाव में शिवसेना और बीजेपी आमने सामने थी लेकिन तीन दशकों से बीएमसी की सत्ता संभाल रही शिवसेना को उस साल नाकों चने चबाने पड़े थे। चुनाव में भले ही शिवसेना को जीत मिली थी लेकिन वह जीत किसी कोई खास मतलब नहीं था। बाद में अपनी नाक बचाने के लिए शिवसेना ने एमएनएस के पार्षदों को भी तोड़कर अपनी पार्टी में मिलाया था।


बीजेपी ने बिगाड़ा शिवसेना का समीकरण!

राज्य में सत्ता बदलते ही शिवसेना के लिए मुंबई महानगर पालिका में भी समीकरण बदलने लगे हैं। एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे सरकार में हुई बीएमसी चुनाव के लिए प्रभागों की संख्या में बढ़ोतरी को रद्द कर दिया। अब प्रभागों की संख्या 236 से घटकर 227 हो गई है। इसे शिवसेना के लिए बड़ा झटका मना जा रहा है, क्योंकि जो 9 प्रभाग मुंबई में बढ़े थे, उनमें चुनावी समीकरण शिवसेना के पक्ष में था। सरकार के फैसले से बीजेपी और कांग्रेस खुश हैं। बीएमसी में पूर्व नेता विपक्ष रवि राजा ने कहा कि पुराना परिसीमन पक्षपात करते हुए किया गया था। उन्होंने प्रभागों की रचना 227 रखने के लिए मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की तारीफ की है।उद्धव सरकार ने जनसंख्या वृद्धि का हवाला देते हुए मुंबई शहर, पश्चिम उपनगर और पूर्वी उपनगर में 3-3 प्रभाग बढ़ा दिए थे। बीजेपी ने शिवसेना पर अपनी सुविधा के हिसाब से प्रभाग बढ़ाने का आरोप लगाया था। शिवसेना के साथ सत्ता में साझेदार रही कांग्रेस ने भी परिसीमन और आरक्षण लॉटरी पर गंभीर आरोप लगाए थे।

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