Thursday, 15 September 2022

गोरेगांव में 2019 में खुले नाले में गिरकर दो साल के बच्चे की मौत, अब मानवाधिकार आयोग ने BMC से मांगा जवाब

Maharashtra : मुंबई (Mumbai) के गोरेगांव (Goregaon) इलाके में तीन साल पहले 11 जुलाई 2019 की रात खुले नाले में बह जाने और लापता हो जाने वाले दो साल के देवांश के मामले में अब एक नया मोड़ आया है. जहां परिवार वालों ने न्याय के लिए लड़ाई जारी रखी है तो वहीं मानवाधिकार कमिशन कोर्ट ने बीएमसी (BMC) की जवाबदेही तय नहीं होने पर सवाल उठाए हैं. गौरतलब है कि दो साल का देवांश खुले नाले में गिर गया था. इसकी सीसीटीवी (CCTV) तस्वीर सामने आई थी पर देवांश का कोई सुराग नहीं मिला था.


पुलिस ने मां-बाप को जिम्मेदार ठहराया

यह सीसीटीवी 11 जुलाई 2019 की रात की है जब लगभग दो साल का देवांश घर से निकलते ही सड़क किनारे खुले नाले के मेनहोल में गिर गया. उस दिन से देवांश का कोई सुराग नहीं मिला. परिवार और स्थानीय लोगों के आंदोलन के बाद मुंबई पुलिस ने बीएमसी (BMC) अधिकारी व कर्मचारी का नाम लिखकर आरोपी तो बना दिया लेकिन किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई. इतना ही नहीं पुलिस ने बच्चे के नाले में गिरने और मौत के लिए मां-बाप की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया.


मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

परिवार ने कानूनी लड़ाई और अपना संघर्ष जारी रखा. इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने अब मुंबई महानगर पालिका के अतिरिक्त आयुक्त के माध्यम से पूछा है की बीएमसी (BMC) वार्ड के असिस्टेंट इनीनियर, सब इंजीनियर और वार्ड के असिस्टेंट कमिश्नर पर घटना और बच्चे के मौत की जवाबदेही क्यों नहीं तय होनी चाहिए. वहीं पीड़ित परिवार का कहना है कि किसी और के घर का देवांश ऐसी मौत नहीं देखे इसलिए वो लड़ाई जारी रखेंगे.

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