Thursday, 8 September 2022

Mumbai: कौन चुरा रहा है मुंबई के डब्बा वालों की साइकिल? फडणवीस को लिखा खत

मुंबई: मुंबई की लाइफलाइन कहे जाने वाले डब्‍बावालों के साथ बड़ी अनहोनी हो रही है। ऐसे में मुंबई के डब्बावालों ने उपमुख्यमंत्री और महाराष्‍ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस से गुहार लगाई है। दरअसल डब्‍बावालों की साइक‍िलें चोरी हो रही हैं। इस पर फडणवीस को लिखे पत्र में डब्‍बावालों ने श‍िकायत की कि शहर में रेलवे स्टेशनों के बाहर खड़ी उनकी साइकिलें चोरी हो रही हैं। उन्होंने पार्किंग में गश्त बढ़ाने की मांग की है। बताया क‍ि लॉकडाउन के दौरान रेलवे स्टेशनों के बाहर पड़ी उनकी कई साइकिलें भी गायब हो गई थीं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पत्र में कहा क‍ि कोरोना महामारी में हमें काफी नुकसान हुआ और इस तरह के और नुकसान को नहीं सह सकते।


दरअसल डब्बावालों एसोसिएशन ने पश्चिम रेलवे के तीन स्टेशनों नालासोपारा, विले पार्ले और बोरीवली का नाम बताया है जहां से उनकी साइकिलें गायब हो गई हैं। पत्र में कहा गया है क‍ि साइकिलें उनके आने-जाने का एकमात्र जर‍िया हैं। और आजकल वे महंगी हैं। इनकी कीमत 10,000 रुपये और उससे अधिक है। मुंबई डब्बावाला एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष तालेकर ने कहा कि बाहरी रेलवे स्टेशनों से साइकिल चोरी के मामले बढ़े हैं और हमने इस मामले को गृह मंत्री के संज्ञान में लाने की कोशिश की है।


सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ाने की गुहार


सुभाष तालेकर ने कहा क‍ि हमारा अनुरोध सुरक्षा के लिए ऐसे स्थानों के बाहर गश्त बढ़ाने का है। हमें महामारी में काफी नुकसान हुआ है और इस तरह के और नुकसान को सहन नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा क‍ि हमने गैर सरकारी संगठनों और दूसरे संगठनों से भी साइकिल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।


हर रोज पहुंचाते हैं करीब दो लाख लंच बॉक्‍स

दरअसल लगभग पांच हजार डब्बावाले मुंबई के कार्यालयों में लगभग दो लाख लंच बॉक्स हर दिन पहुंचाते हैं। डब्बावाले अपनी ब‍िना गलती वाले ड‍िलीवरी स‍िस्‍टम के लिए जाने जाते हैं। इसकी स्‍टडी ग्‍लोबल मैनेजमेंट एक्‍सपर्ट की ओर से किया गया है। मुंबई डब्बावाला असोसिएशन एक 'रोटी बैंक’ भी चलाता है। इसके जर‍िए सरकार की ओर से संचालित टाटा मेमोरियल अस्पताल, केईएम अस्पताल और वाडिया अस्पताल में इलाज कराने के लिए आए मरीजों के परिजनों को मुफ्त भोजन दिया जाता है।


1890 में शुरू हुई थी सेवा

साल 1890 में शुरू होने के बाद से टिफिन सर्विस पर पूरा मुंबई निर्भर करता आ रहा है। डब्‍बावालों की अनोखी कार्यशैली के चलते इन्‍हें कई सम्‍मानों से भी नवाजा जा चुका है। इनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटेन के राजघरानों को भेजे गए डब्‍बावालों के तोहफों को आज भी वहां की गैलरी में सम्मान के साथ सजाकर रखा जाता है।

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