Friday, 9 September 2022

आस्था या खिलवाड़...पुलिस का उस पर अत्याचार



उल्हासनगर। इन दिनों महाराष्ट्र सहित पूरे देश भर में गणेश उत्सव की धूम मची हुई है। आज 10वें दिन अनंत चतुर्दशी को हिंदू रीति रिवाज के हिसाब से उत्सव की समाप्ति हो रही है मगर कुछ गणेश भक्त 11 दिन का 13 दिन का संकल्प लेकर गणेश मूर्ति स्थापित करते हैं। यह आस्था के खिलाफ है मगर हिंदू समाज में आस्था से बढ़कर कुछ नहीं। जो जिसको जैसे समझ आए वह भक्त करते आए हैं और करते रहे हैं पर इस वक्त पुलिसिया डंडा इन भक्तों का डराता हुआ दिख रहा है।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उल्हासनगर में पुलिस डिपार्टमेंट का खौफ इन भक्तों के ऊपर दिख रहा है। बड़े-बड़े पंडाल जो 11 और 13 दिन की पूजा के लिए मशहूर है, उनको 2 दिन से पुलिस बार-बार जाकर डरा धमका रही है कि आज कैसे भी अपनी गणेश मूर्ति विसर्जन करो वरना पुलिस वाले आकर गणपति उठाकर विसर्जन कर देंगे और तुम लोगों के ऊपर केस कर अंदर कर देंगे। पुलिस का यह रूप देख सुन कर अच्छा भी लग रहा है पर दूसरी तरफ कुछ पंडाल के लिए अलग कानून और कुछ लोगों के लिए कठोरपन, ये सोचने वाली बात है... खासकर उल्हासनगर में 13 दिन की किसी को परवानगी तो किसी के साथ आज ही के लिए ही जोर जबरदस्ती क्यों...? 


  • क्या हिंदू समाज में पुलिस का कानून सबके लिए अलग-अलग है...? 
  • क्या उल्हासनगर जोन में अलग-अलग कानून है ...?
  •  क्या उल्हासनगर सेंट्रल पुलिस हद में दो-दो कानून है...? 

पुलिस के इस रूप से कुछ पंडाल वाले ना चाहते हुए भी गणेश मूर्ति आज विसर्जन करने को राजी हुए हैं तो कुछ लोग अपनी आस्था को कायम रखते हुए पुलिस के इस दोगले रूप का विरोध कर रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस सब के लिए एक ही कानून बनाएगी या अलग-अलग कानून बनाकर किसी को 13 दिन का मौका देगी या किसी का आज ही जोर जबरदस्ती डरा धमकाकर केस करके विसर्जन करवाएगी।

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