Saturday, 10 September 2022

शनिवार सुबह तक भगवान गणेश की 38,000 से अधिक मूर्तियों को विसर्जित किया गया

 

Mumbai: महाराष्ट्र में 10 दिवसीय उत्सव के समापन के बाद शनिवार सुबह तक भगवान गणेश की 38,000 से अधिक मूर्तियों का मुंबई के विभिन्न जल निकायों में विसर्जन किया गया, जबकि शहर में कुछ स्थानों पर विसर्जन शोभायात्रा अभी भी जारी है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मूर्तियों को दक्षिण मुंबई में गिरगांव चौपाटी (समुद्र तट) में कृत्रिम तालाबों और कुछ अन्य जल निकायों में विसर्जित किया गया।


गिरगांव चौपाटी स्थान लालबागचा राजा, गणेश गली और अन्य लोकप्रिय गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए प्रमुख स्थानों में से एक है। शिवाजी पार्क, बांद्रा, जुहू और मलाड सहित शहर भर के अन्य समुद्र तटों पर भी मूर्तियों का विसर्जन किया गया। विसर्जन शोभायात्रा शुक्रवार सुबह से ही निकलना शुरू हो गई थी।


महाराष्ट्र समेत देश भर में 10 दिवसीय उत्सव इस वर्ष विशेष उत्साह और धूमधाम से मनाया गया क्योंकि पिछले दो साल कोविड-19 के कारण प्रतिबंध लागू थे।बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार सुबह नौ बजे तक शहर में भगवान गणेश की 38,214 मूर्तियों का विसर्जन किया गया।


लालबागचा राजा गणेश प्रतिमा शहर में उत्सव के मुख्य आकर्षण में से एक है, जिसे शुक्रवार को जुलूस शुरू होने के लगभग 22 घंटे बाद सुबह नौ बजकर 15 मिनट पर विसर्जित किया गया। लालबागचा राजा का जुलूस शनिवार तड़के गिरगांव चौपाटी पहुंचा। लालबागचा राजा को विदा करने के लिए विसर्जन स्थल पर भारी भीड़ जमा रही।बीएमसी अधिकारी ने बताया, ‘‘विसर्जन जुलूस के दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।’’


बीएमसी के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि लालबागचा राजा के बाद गिरगांव चौपाटी में विसर्जन प्रक्रिया लगभग समाप्त हो गई। हालांकि, यह अभी भी पश्चिमी उपनगरों में जारी है और इसमें कुछ और घंटे लगने की संभावना हैं।


उन्होंने बताया कि विसर्जन शोभायात्रा के कारण कईं मार्गों पर यातायात की आवाजाही रोक दी गई थी। मुंबई की सड़कों पर निगरानी रखने के लिए 3,200 अधिकारियों सहित 20,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहे।


अधिकारियों ने बताया कि राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) की आठ कंपनियां, त्वरित कार्रवाई बल की एक कंपनी और 750 होमगार्ड भी तैनात किए गए थे।बीएमसी ने 73 प्राकृतिक और 162 कृत्रिम जल निकायों में विसर्जन की सुविधा प्रदान की थी और लगभग 10,000 स्वयं सहायता कर्मियों को तैनात किया गया था।

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