Wednesday, 21 September 2022

अक्सा बीच के पास छिपकली तस्कर गिरफ्तार, वन विभाग को मिली बड़ी सफलता

महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई के अक्सा बीच में मॉनिटर छिपकली की तस्करी का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि छिपकली के अंगों का इस्तेमाल दवाई बनाने के लिहाज से तस्करी की गई थी. दरअसल, अक्सा बीच के पास रहने वाले एक शख्स ने पुलिस और वन विभाग को एक ऐसे शख्स को पकड़ने में मदद की है, जो दवाइयों के उद्देश्यों’ के लिए मांस खाने और तेल निकालने के इरादे से एक़ भारतीय मॉनिटर छिपकली की अवैध रूप से तस्करी कर रहा था. फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.


दरअसल, रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला मुंबई के अक्सा बीच इलाके का हैं. पुलिस के अनुसार, बीते 14 सितंबर की सुबह, नाथूराम सूर्यवंशी जोकि अक्सा बीच पर लाइफगार्ड के रूप में तैनात था. इस दौरान जब उसने एक शख्स को एक मॉनिटर छिपकली पकड़े हुए देखा तो ऐसे में लाइफगार्ड को देखते ही, आरोपी ने जल्दी से जानवर को प्लास्टिक की थैली में डाल दिया.इस पर सूर्यवंशी ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग और पुलिस को दी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे,जिसके बाद आरोपी शख्स को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है. हालांकि, यह छिपकली मरी पाई गई थी.


वन विभाग की टीम कर रही केस की जांच-पड़ताल

वहीं, इस मामले पर महाराष्ट्र वन विभाग के मुंबई रेंज के वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि आरोपी को 15 सितंबर को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था. जहां आरोपी की पहचान मलाड के मल्हार चॉल के रहने वाले गोरख चाखोजी जाधव (35) के तौर पर हुई है. ऐसे में आरोपी जाधव को स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया है. जहां से उसे वन विभाग की हिरासत में भेज दिया है. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि इस छिपकली का इस्तेमाल मुखयत घुटने और जोड़ों की समस्याओं से पीड़ित लोगों को दवा के रूप में किया जाता है. बता दें कि, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इन दुर्लभ प्रजाति के जीवों को रखना या इनका व्यापार करना अवैध है.फिलहाल इस मामले की वन विभाग की टीम जांच-पड़ताल कर रही है.

Lorem ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry.