Wednesday, 17 August 2022

NCP का बड़ा नेता जाएगा जेल..मोहित कंबोज के ‘तांडव’ ट्वीट पर अजित पवार के नाम पर चर्चा क्यों?

मुंबई: बीजेपी के एक नेता मोहित कंबोज ने बुधवार को सिलसिलेवार ट्वीट किए। उनके इन ट्वीट के बाद महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मच सकता है। कहा जा रहा है कि यहां की राजनीति में नया भूचाल आ सकता है। बीजेपी नेता मोहित कंबोज का दावा है कि जल्द ही एनसीपी (NCP) का कोई बड़ा नेता गिरफ्तार हो सकता है। उनके इस ट्वीट के बाद उस नेता के नाम के कयास लगने शुरू हो गए। मोहित कंबोज ने एक ट्वीट में महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MVA) के जेल गए चार नेताओं के नाम लिखे और पांचवे नेता का नाम पूछा। कुछ ही देर में पांचवें नाम को लेकर लोग खुलासा करने लगे। अधिकांश लोगों ने दो नाम ही लिखे, एक अजित पवार का और दूसरा प्रफुल्ल पटेल का। आपको बताते हैं कि इन दोनों नेताओं में भी सबसे ज्यादा चर्चा अजित पवार को लेकर ही है क्योंकि उससे पहले के एक ट्वीट में मोहित कंबोज ने लिखा कि सिंचाई घोटाले की जांच फिर से होनी चाहिए, जिसे आईपीएस परमबीर सिंह ने 2019 में बंद कर दिया था।


एनसीपी (NCP) को दो बड़े नेता नवाब मलिक और अनिल देशमुख पहले से ही जेल में हैं। दोनों एमवीए सरकार में मंत्री थे। वहीं हाल ही मे ईडी ने शिवसेना के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। चौथे नेता संजय पांडेय हैं, वह भी जेल में हैं। अब पांचवे नाम को लेकर रहस्य है।


‘गर्लफ्रेंड्स के नाम प्रॉपर्टीज’

मोहित कंबोज ने दावा किया है कि जल्द ही वह प्रेस कॉन्फ्रेस करके उस पांचवे नेता का खुलासा करेंगे जो जेल जाएगा। उन्होंने पांच पॉइंट्स लिखे जिस पर उस नेता के भ्रष्टाचार का खुलासा करेंगे। उन्होंने लिखा, भारत और विदेश में संपत्ति की सूची, बेनामी कंपनियां, गर्ल फ्रेंड्स के नाम पर प्रॉपर्टीज, विभिन्न विभागों में मंत्री के रूप में किया भ्रष्टाचार, पारिवारिक आय और संपत्ति सूची, सामने लाएंगे।


क्यों निशाने पर अजित पवार?

महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक में 25000 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा किया गया था। इस घोटाले के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं सुरेंद्र अरोड़ा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। जिसकी सुनवाई पिछले वर्ष 31 जुलाई 2019 को पूरी हुई थी। साल 2005 से लेकर साल 2010 के दौरान बैंक ने भारी तादात में लोगों को लोन दिया था। इनमें से ज्यादातर लोन चीनी कारखानों और सूत बनाने वाली मिलों को दिया गया था। कर्ज देते समय नियमों का उल्लंघन भी बड़े पैमाने पर हुआ था। खास तौर पर कई नेताओं के कारखानों को यह लोन दिया गया था। लेकिन इस लोन की वसूली ना हो पाने की वजह से बैंक को काफी नुकसान हुआ।


25000 करोड़ घोटाले का जिन्न फिर आएगा बाहर?

इस घोटाले में अजित पवार समेत 70 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 506, 409, 465 और 467 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस घोटाले में शिवसेना के नेता आनंद राव अडसूल, भाजपा के विजय सिंह मोहिते पाटील समेत अन्य दल के नेताओं के नाम थे। तत्कालीन अघाडी सरकार के समय यह घोटाला चर्चा में आया था। संचालक मंडल द्वारा नियमों का उल्लंघन करने की वजह से इस कॉपरेटिव बैंक का काफी नुकसान हुआ था।


दाखिल हो चुकी है क्लोजर रिपोर्ट

साल 2011 में रिजर्व बैंक ने तत्कालीन संचालक मंडल को बर्खास्त कर दिया था। इस मंडल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और मौजूदा उपमुख्यमंत्री अजित पवार, हसन मुश्रीफ समेत कई नेताओं के नाम थे। हालांकि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस केस की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसमें कहा गया है कि अजित पवार सहित सभी 69 लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, इसलिए उन्हें क्लीन चिट दे दी गई।


सिंचाई घोटाले में आया था अजित का नाम

सबसे ज्यादा कयास सिंचाई घोटाले को लेकर है। साल 2012 में यह घोटाला सामने आया था। इसमें आरोप लगा था कि महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के शासनकाल के दौरान 1999-2000 में 35 हजार करोड़ करोड़ रुपये की अनियमिततताएं सामने आईं थीं। एसीबी ने इस केस में कुछ सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया था। अजित पवार पर ऐसे आरोप थे कि उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सिंचाई से जुड़े हर तरह के प्रॉजेक्ट्स और उनके बढ़ते हुए बजट को मंजूरी दी थी। इसी के चलते वह शक के दायरे में आ गए थे। इस मामले की फिर से जांच की मांग कंबोज ने की है इसलिए सबसे ज्यादा शिकंजा कसने के कयास अजित पवार पर ही लगाए जा रहे हैं।


एनसीपी प्रवक्ता महेश तपासे ने एनबीटी ऑनलाइन को बताया कि सिंचाई घोटाले के मामले में खुद तत्कालीन डीजी परमबीर सिंह ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट सबमिट की थी। जिसमें घोटाले के आरोप को गलत बताया गया था।


प्रफुल्ल पटेल के नाम पर इसलिए चर्चा

प्रफुल्ल पटेल मनोहरभाई पटेल के बेटे हैं। मनोहरभाई पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता थे, जो कि महाराष्ट्र में गोंदिया भंडारा जिलों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए थे। साल 2009 में यूपीए की सरकार में प्रफुल्ल पटेल को अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ का अध्यक्ष बनाया गया था। प्रफुल्ल पर आरोप है कि वह इस पद पर बने रहने के लिए साम दाम दंड भेद सब कुछ करने में लगे रहे। इस पद पर काबिज रहने के लिए प्रफुल्ल ने फीफा से साठगांठ तक कर ली। आखिरकार अपनी किरकिरी करवाने वाले प्रफुल्ल को सुप्रीम कोर्ट की लताड़ के बाद इस पद से हाथ धोना पड़ा। भारत के स्पोर्ट्स कोड के मुताबिक कोई भी व्यक्ति 3 बार से ज्यादा अध्यक्ष नहीं बन सकता।


ईडी जब्त कर चुकी है प्रॉपर्टी

बीते कुछ समय पहले ही प्रफुल्ल पटेल की प्रॉपर्टी को ईडी ने जब्त किया है। यह मामला अंडरवर्ल्ड डॉन इकबाल मिर्ची से जुड़ा बताया जाता है। इस कार्रवाई में ईडी ने सीजे हाउस स्थित पटेल के घर को सीज करने की कार्रवाई की है। 

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