Tuesday, 16 August 2022

Maharashtra: हिन्दुस्तान के पैसे पर चीन की नजर? लोन के नाम पर लोगों के साथ ऐसे हो रही धोखाधड़ी और पैसा जा रहा विदेश

Mumbai: मुंबई पुलिस (Mumbai Police) पिछले कुछ महीनों से ऑनलाइन लोन एप्लिकेशन से लोगों के साथ हो रही धोखाधड़ी के मामले की जांच कर रही है और इसी जांच के दौरान पुलिस को पता चला की ऑनलाइन लोन एप्लिकेशन के जरिए लोगों को फंसाकर चीन के लोगों ने करोड़ों रुपए के क्रिप्टो करंसी खरीदे हैं. इस पूरे मामले में अलग-अलग समय पर मुंबई पुलिस ने 18 लोगों को गिरफ्तार किया है और इनकी जांच के दौरान कई खुलासे हुए हैं. मुंबई साइबर क्राइम के DCP हेमराज सिंह राजपूत ने ABP न्यूज़ को जानकारी दी की हमें जब इस मामले की जानकारी मिली तो हमने जांच शुरू कर दी और फिर भारत के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया. इस मामले में हमने 350 से ज्यादा बैंक अकाउंट्स फ्रीज किए हैं, जिसमें 17 करोड़ की राशि है. उन्होंने कहा कि और भी अकाउंट्स को हम इसी तरह से फ्रीज करने का काम कर रहे हैं. हमें बहुत से अकाउंट्स की जानकारी मिली है.


पुलिस ने 200 से ज्यादा क्रिप्टो करंसी वॉलेट को किया सीज

राजपूत ने आगे बताया की हमें जांच में पता चला कि इन आरोपियों ने क्रिप्टो वॉलेट भी बनाकर रखे है जहां ये पैसों को क्रिप्टो करंसी में बदलते हैं और फिर सारा पैसा विदेश भेज दिया जाता है. इसके बाद हमने अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट की पहचान की और फिर 200 से ज़्यादा क्रिप्टो करंसी के वॉलेट को फ्रीज किया. चौंकाने वाली बात यह रही की इन वॉलेट में जितने क्रिप्टो करंसी हैं उनकी वेल्यू 9 करोड़ रुपए से ज़्यादा है. राजपूत ने आगे यह भी बताया कि हमने अबतक 300 से ज़्यादा लोन एप्लिकेशन की पहचान की और उसे तत्काल प्रभाव से बंद कराया है. बता दें की इन्ही लोन एप्लिकेशन का फायदा उठाकर आरोपी लोगों से पैसों की वसूली करते थे. इसके अलावा और भी बहुत सारे ऐसे लोन एप्लिकेशन हैं जिसे बंद करने की प्रक्रिया चल रही है.


DCP हेमराज सिंह राजपूत ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि ये लोग लोन एप्लिकेशन चलाने के लिए कंपनी बनाते थे और ऐसी करीबन 200 से ज़्यादा शेल कंपनी पर हमने कार्रवाई की है जो कि सिर्फ नाम की थी और फर्ज़ी पते पर बनाई गई थी ताकि इनके नाम पर लोन एप्लिकेशन के माध्यम से आने वाले पैसों के लिए बैंक अकाउंट खोले जा सके.



लोगों को ऐसे लूटते थे आरोपी?

कई लोगों को 5 या 10 हज़ार रुपए का लोन चाहिए होता है. ये आरोपी खुद की पब्लिसिटी सोशल मीडिया के माध्यम से करते हैं और जैसे ही लोग उन्हें पैसों के लिए सोशल मीडिया पर सम्पर्क करते हैं वैसे ही आरोपी विक्टिम को एक लिंक भेजता है और कहता है इस एप्लिकेशन को डाउनलोड करिए प्रक्रिया का पालन करो, लोन कुछ ही मिनट में मिल जाएगा. राजपूत ने बताया की एक बार विक्टिम ने उस एप्लिकेशन को डाउनलोड किया तो उसे अपने फ़ोन के एक्सेस उसे देना होता है और जैसे वो एक्सेस दे देता है आरोपी के पास विक्टिम के दोस्तों की लिस्ट, फ़ेसबुक और दूसरे एप्लिकेशन जो उसके फ़ोन में होता है उसका एक्सेस और उसके फ़ोन के गैलरी का एक्सेस मिल जाता है. और इसके बाद आरोपी विक्टिम को परेशान करना शुरू कर देते हैं इसे धमकी देना शुरू कर देते हैं और इसके लिए वो उसके फ़ोटो को मोर्फ कर उसे पहले भेजते हैं और धमकाते हैं की अगर वो पैसे नही भेजता है तो वो इस फ़ोटो या वीडियो को उसके दोस्तों और परिवार के लोगों को भेजना शुरू कर देंगे. राजपूत ने बताया को उनके पास दर्ज कुल अब तक 6 मामलों में उन्होंने आरोपियों को गिरफ़्तार किया है और यह मामला बहुत बड़ा है और पूरे विश्व में फैला हुआ है.


चीन की भारत को लूटने की साजिश?

इस मामले की जांच के दौरान मुंबई पुलिस ने दो चीन के नागरिकों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया है जिनके नाम Liu Yi और Zhou Ting Ting हैं. ये आरोपी इन तमाम आरोपियों के चाइना में बैठे बॉस हैं और वहां से पूरे व्यापार को कंट्रोल करते हैं. राजपूत में बताया की ये आरोपी साल 2018 में भारत में आए थे और यहां आने के बाद उन्होंने इन कम्पनियों को बनाया और उसके लिए भारत के रहने वाले नागरिकों को काम पर रखा. भारत से वापस चाइना जाने से पहले उन्होंने इन कंपनियों के पूरे कंट्रोल को अपने पास रखा और चाइना में बैठकर हर एक ट्रांसक्शन पर नज़र बनाकर रखने लगे और जांच एजेंसियों के हाथ इनतक ना पहुंचे इसके लिए चीन के आरोपियों ने शेल कंपनी को भारतीय नागरिक के नाम पर लिस्ट कराया था जो की उस कंपनी में बतौर टीम लीडर के रूप में काम करता था.


राजपूत ने बताया की बहुत सारे लोग इनका शिकार लॉकडाउन के समय में हुए थे जब कई लोगों की नौकरी चली गई थी और लोगों को पैसों की ज़रूरत थी, तब लोग उन्हें संपर्क कर लोन की मांग करते थे और फिर आरोपी इनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें ब्लैकमेल करते थे और उनसे वसूली करते थे.


आरोपियों को कितने पैसे मिलते थे?

जांच में पता चला कि आरोपियों को वसूली करने के लिए वेतन के अलावा अलग से इंसेंटिव मिलता था और इसी इंसेंटिव के लिए आरोपी बड़ी-बड़ी धमकियां देते थे. हर एक कॉलर को 35-40 हज़ार रुपए वेतन दिया जाता था और वसूली करने पर उतना ही या उससे ज़्यादा का इंसेंटिव उन्हें मिला करता था.

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