Saturday, 13 August 2022

मोदी ने कश्मीर से कन्याकुमारी व मुंबई से गुवाहाटी तक में तिरंगा फहराने का किया आह्वान: कटारिया

चंडीगढ़ : पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व अंबाला लोकसभा सांसद रतनलाल कटारिया ने तिरंगा यात्रा में भाग लेते हुए कहा कि हमारे लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की जंगे आजादी में भाग लेते हुए, देश के हजारों स्थानों पर अंग्रेजों के जूनियन जैक को उतार कर भारत का तिरंगा लहराया था। बाद में यही घटनाए, आजादी का मूवमेंट बन गई।


कटारिया ने कहा कि प्रारंभ में हमारे देश का तिरंगा ध्वज कुछ भिन्न था, आजादी से पहले इसमें गांधी जी के चलते हुए चरखे को शामिल किया गया था। परंतु बाद में इसमें चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान दिया गया और 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने वर्तमान ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में मान्यता प्रदान की। इस अवसर पर कटारिया ने भारत के महान शहीदों भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, खुदीराम बोस, अशफाक उल्ला खां, रोशन लाल, राम प्रसाद बिस्मिल व चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि देश 23 मार्च 1931 के काले दिवस को कभी नहीं भूलेगा जब केंद्रीय असेंबली में बम फेंकने वाले और सांडर्स को मौत के घाट उतारने वाले क्रांतिकारियों को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था। इसी प्रकार हम काकोरी की घटना को भी कभी नहीं भूल सकते जब स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के खजाने को लूटा था ताकि देश की आज़ादी की लड़ाई के लिए हथियार इक्कठा किये जा सकें l 


कटारिया ने कहा कि तिरंगा हमारे राष्ट्र की आन-बान-शान है, इसलिए आजादी के इस 75वें अमृत महोत्सव में भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर से कन्याकुमारी और मुंबई से गुवाहाटी तक में तिरंगा फहराने का आह्वान किया है, जिसे सारा राष्ट्र भव्य उत्सव के रूप में मना रहा है। कटारिया ने कहा कि हमारे देश का सौभाग्य है कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जितने भी आह्वान देश की जनता के सामने किए हैं, 130 करोड़ लोगों ने अपना भरपूर सहयोग उसे पूरा करने के लिए दिया है। चाहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान हो, चाहे स्वच्छ भारत अभियान हो, चाहे कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से निपटने के लिए किए गए उपाय हो सभी में देश के करोड़ों लोगों ने उनका भरपूर सहयोग किया है और हो भी क्यों ना, क्योंकि आज वैश्विक पटल पर हर देश भारत से मित्रता करने के लिए उत्सुक है l आज भारत अपनी परंपराओं, संकल्पो और पारदर्शी नीतियों के कारण विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है।


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