Tuesday, 2 August 2022

ईडी ने शिवसेना सांसद संजय राउत के दो ठिकानों पर मारा छापा, मुंबई में की गई कार्रवाई

मुंबई : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को शिवसेना सांसद संजय राउत के मुंबई स्थित दो स्थानों पर छापेमारी की है. शिवसेना सांसद के ठिकानों पर पात्रा चॉल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच एजेंसी की ओर से यह कार्रवाई की गई है. इसके साथ ही, जांच एजेंसी ने संजय राउत को एक और समन जारी किया है. इस मामले में शिवसेना सांसद फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं. सांसद संजय राउत को ईडी ने रविवार की आधी रात को मुंबई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था. इससे पहले जांच एजेंसी ने उनसे करीब 13 घंटे तक पूछताछ की थी.


शिवसेना ने ईडी की कार्रवाई की निंदा की

उधर, शिवसेना ने अपने राज्यसभा सदस्य संजय राउत को ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने पर मंगलवार को भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान भी विपक्ष को इस तरह निशाना नहीं बनाया गया था. पार्टी के मुखपत्र सामना में एक संपादकीय में, शिवसेना ने कहा कि अगर विपक्ष के साथ सम्मानपूर्वक आचरण नहीं किया जाता है तो लोकतंत्र और एक देश नष्ट हो जाता है.


आधी रात को ईडी ने संजय राउत को किया था गिरफ्तार

बता दें कि शिवसेना सांसद संजय राउत को ईडी ने रविवार की आधी रात को मुंबई में एक चॉल पुनर्विकास योजना से संबद्ध धन शोधन के मामले में गिरफ्तार किया था. उन्हें चार अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेजा गया है. शिवसेना ने कहा कि राज्यसभा सांसद और सामना के कार्यकारी संपादक राउत को राजनीतिक प्रतिशोध के चलते गिरफ्तार किया गया था और कथित पात्रा चॉल मामले में उन्हें फंसाने के लिए कई झूठे सबूत पेश किए गए.


संजय राउत ने ईडी को भेजा था पत्र

सामना के संपादकीय में कहा गया है कि अगर राउत ने भाजपा के साथ गठबंधन किया होता, तो वह भी उसकी ‘वाशिंग मशीन' में साफ हो जाते. राउत को जल्दबाजी में गिरफ्तार किए जाने को लेकर सवाल उठाते हुए शिवसेना ने कहा कि उन्होंने ईडी को एक पत्र सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि वह संसद के मानसून सत्र और उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद धन शोधन रोधी एजेंसी के समक्ष पेश होंगे. शिवसेना के अनुसार, ईडी ने लेकिन इस पर विचार नहीं किया और रविवार को सुबह उनके आवास पर छापा मारा.


सच बोलने वालों का घोंटा जा रहा है गला

संपादकीय में कहा गया है कि सत्ता में बैठे लोगों ने सच बोलने वाले लोगों की जुबान काटने या गला घोंट देने का फैसला किया है. ऐसा तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान भी नहीं हुआ था. बता दें कि देश में 1975-77 के दौरान आपातकाल लगाया गया था और कई विपक्षी नेताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया था.

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