Tuesday, 2 August 2022

शिंदे और ठाकरे समर्थकों के बीच ढिशूम-ढिशूम, ठाणे के डोंबिवली में शिवसेना के दोनों गुटों में लड़ाई

मुंबई से सटे ठाणे, कल्याण, डोंबिवली शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट का गढ़ है. ठीक उसी तरह जिस तरह से मुंबई उद्धव ठाकरे की शिवसेना का गढ़ है.आज सूत्रों के हवाले से यह खबर आई है कि शिंदे गुट के नेताओं को बीएमसी चुनाव से पहले मुंबई के नगरसेवकों को तोड़ने के काम में लगाया गया है. सबको अलग-अलग पांच से छह लोगों के संपर्क में रहने को कहा गया है. इस बीच शिंदे के गढ़ डोंबिवली की एक शिवसेना शाखा में शिंदे और ठाकरे गुट के कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई.


मुंबई में शिंदे गुट शुरू से ही अपना वर्चस्व स्थापित करना चाह रहा है. लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है. अब तक एक नगरसेवक श्वेता म्हाले को ही शिंदे गुट अपने साथ लाने में कामयाब हो पाई है. इस बीच आज (2 अगस्त, मंगलवार) मुंबई से सटे ठाणे जिले के डोंबिवली की एक शिवसेना शाखा में शिंदे गुट के कुछ कार्यकर्ता पहुंच गए. इन कार्यकर्ताओं के हाथ में एक ड्रिल मशीन, सीएम एकनाथ शिंदे की एक फ्रेम करवाई हुई तस्वीर और कुछ कीलें थीं. इन्होंने शिवसेना की शाखा कार्यालय में घुस कर बालासाहेब ठाकरे के बगल में एकनाथ शिंदे की तस्वीर लगा दी. ऐसा करने से वहां पहले से मौजूद उद्धव ठाकरे समर्थक कार्यकर्ता भड़क गए और दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के पीछ जबर्दस्त फाइटिंग हो गई.


क्या हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ?

सीएम एकनाथ शिंदे अपने हर भाषण में अपने राजनीतिक गुरु आनंद दिघे और बालासाहेब ठाकरे का नाम लेते हैं. अब ऊपर लगी तस्वीर देख कर क्या हुआ, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इस तस्वीर में सबसे पहले आनंद दिघे की तस्वीर लगी हुई दिखाई दे रही है. साथ ही बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर लगी हुई है. इन दोनों फोटो के बीच एकनाथ शिंदे के समर्थक सीएम शिंदे की तस्वीर लगाते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि सबसे दायीं तरफ श्रीकांत शिंदे की भी बिना फ्रेम की हुई तस्वीर लगी हुई है. लेकिन उनकी तस्वीर से एतराज नहीं है क्योंकि एकनाथ शिंदे के बेटे होने के बावजूद वे स्थानीय सांसद हैं और वह तस्वीर वैसे भी पहले से ही लगी हुई है. लेकिन आज जब एकनाथ शिंदे समर्थकों ने सीएम शिंदे की तस्वीर लगाई तो ठाकरे समर्थक शिवसैनिक भड़क गए.


जहां-जहां शिवसेना का गढ़, वहा-वहां शिंदे के पक्ष में समर्थन रहा है बढ़

मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, कोंकण शिवसेना के गढ़ समझे जाते हैं. इनमें से अगर मुंबई को छोड़ दें तो सभी जगह आज शिंदे गुट का प्रभाव बढ़ चुका है. सबसे पहले ठाणे के नगरसेवकों ने एकनाथ शिंदे को अपना समर्थन दिया. इसके बाद नवी मुंबई, नागपुर और फिर कल्याण-डोंबिवली के नगरसेवक और हजारों कार्यकर्ता शिंदे गुट में शामिल हो गए. बस शिंदे गुट ठाकरे के वर्चस्व को अब तक मुंबई में चुनौती नहीं दे पाया है. लेकिन इस वर्चस्व की लड़ाई में लगातार तनाव बढ़ता ही रहा है.

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