Saturday, 13 August 2022

नवाब मलिक को झटका, समीर वानखेड़े पर मुस्लिम होने का आरोप गलत साबित हुआ

कास्ट स्क्रूटिनी कमिटी ने मुंबई एनसीबी के पूर्व जोनल डिरेक्टर समीर वानखेड़े को क्लीन चिट दे दी है. यानी समीर वानखेड़े जन्म से मुस्लिम नहीं हिंदू हैं. उनका ताल्लुक अनुसूचित जाति से ही है. उनके पिता ज्ञानदेव वानखेड़े महार जाति से हैं. उन्होंने भले ही एक मुस्लिम महिला से शादी की थी, लेकिन अपना धर्म नहीं बदला था. वे ज्ञानदेव से दाऊद नहीं हुए थे. इसलिए समीर वानखेड़े पर नवाब मलिक का आरोप गलत है कि उन्होंने मुस्लिम होने की बात छुपाई और अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ लेकर आईआरएस अधिकारी की नौकरी पाई.


कास्ट स्क्रूटिनी कमिटी ने अपनी पड़ताल में यह साफ कहा है कि समीर वानखेड़े जन्म से मुस्लिम नहीं थे. यह साबित नहीं होता कि उनके पिता ने और बाद में उन्होंने भी अपनी पहली शादी के वक्त (एक मुस्लिम महिला से हुई थी पहली शादी) अपना धर्म बदला. वे महार -37 अनुसूचित जाति के हैं, यह बात साबित होती है. महा विकास आघाड़ी सरकार के वक्त एनसीपी नेता और मंत्री नवाब मलिक ने काफी आक्रामकता के साथ समीर वानखेड़े के मुस्लिम होने की बात उठाई थी.


मुस्लिम नहीं महार, कास्ट स्क्रूटिनी कमिटी ने किया स्वीकार

नवाब मलिक ने दावा किया था कि ना सिर्फ समीर वानखेड़े की मां मुस्लिम थी बल्कि उनके पिता ने भी इस्लाम कुबूल कर लिया था. इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि अपनी पहली शादी के वक्त समीर वानखेड़े को मुस्लिम ही बताया गया था. वरना एक मुस्लिम लड़की से निकाह तब तक कुबूल नहीं होता, जब तक लड़का मुस्लिम ना हो. इसके लिए उन्होंने उस मौलवी का जिक्र भी किया था जिसने समीर वानखेड़े की पहली शादी करवाई थी. उस मौलवी ने भी मीडिया को यह कहा था कि उनके सामने जो निकाहनामा है, उसमें यही लिखा है कि समीर दाऊद वानखेड़े हैं. इसके बाद समीर वानखेड़े की पहली पत्नी से तलाक हो गया था. उन्होंने दूसरी शादी मराठी फिल्म अभिनेत्री क्रांति रेडकर से की. उन्होंने इस फैसले का अपने ट्वीट में स्वागत किया है. उनका ट्वीट ऊपर संलग्न किया हुआ है.


समीर वानखेड़े ट्वीट किया, ‘सत्यमेव जयते’ लिखा

समीर वानखेड़े ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए एक ट्वीट किया है और अपने ट्वीट में ‘सत्यमेव जयते’ लिखा है. समीर वानखेड़े ने अपनी सफाई में कहा था कि उन्होंने और उनके पिता ने उनकी मां (जो मुस्लिम थी) के जज़्बात का ख़याल करते हुए कोर्ट मैरेज करने के साथ-साथ इस्लामिक रीति-रिवाजों से भी शादी की थी लेकिन कोर्ट के मैरेज सर्टिफिकेट में उनके इस्लाम धर्म कबूलने की बात नहीं जाहिर की गई है. अगर उन्होंने या उनके पिता ने इस्लाम स्वीकार किया होता तो सरकारी दस्तावेजों में भी इसे दर्ज किया होता.


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