Saturday, 23 July 2022

Maharashtra: शिंदे-फडणवीस सरकार के MVA को झटके पे झटके, रश्मि शुक्ला फोन टेपिंग समेत दो केस CBI को सौंपे

महाराष्ट्र की शिंदे-फडणवीस सरकार ने महा विकास आघाड़ी को एक और झटका दिया है. ठाकरे सरकार आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला फोन टेपिंग केस और बीजेपी नेता गिरीश महाजन के खिलाफ फिरौती और आपराधिक साजिश रचने के केस की जांच पुलिस से करवा रही थी. केस की जांच के सिलसिले में मुंबई पुलिस ने डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की भागीदारी की जांच के लिए उनसे पूछताछ भी की थी और उनका स्टेटमेंट रिकॉर्ड करवाया था. सरकार बदलते ही ये केस अब सीबीआई को सौंप दिए गए हैं.


महाराष्ट्र सरकार ने राज्य पुलिस को आदेश देकर राज्य के गुप्तचर विभाग (SID) से अहम और संवेदनशील कॉल रिकॉर्डिंग्स से जुड़ी सूचनाएं लीक होने के मामले की जांच का काम सीबीआई को सौंपने को कहा है. दूसरा केस बीजेपी नेता गिरीश महाजन और अन्य 28 लोगों पर फिरौती और आपराधिक साजिश रचने से संबंधित आरोप का है. इस केस की जांच भी सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया गया है.


ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलाली के आरोप के जवाब में फोन टेपिंग का आरोप

महा विकास आघाड़ी सरकार के वक्त देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया था कि राज्य में पुलिस अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी शुरू है. फडणवीस का इशारा सीधे-सीधे महा विकास आघाड़ी सरकार में गृहमंत्री रहे अनिल देशमुख पर था. अनिल देशमुख ने बाद में पूछताछ में यह कबूल किया था कि उन्हें मोहरा बनाया जा रहा है. दरअसल अधिकारियों की लिस्ट लाकर शिवसेना नेता और तात्कालीन परिवहन मंत्री अनिल परब देते थे. वे जिन अधिकारियों की पोस्टिंग जहां करने को कहते थे, वे हस्ताक्षर कर देते थे.


मुंबई पुलिस ने इस संबंध में मार्च 2021 में ऑफिशियल सीक्रेट्स ऐक्ट के तहत अनजान लोगों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज किया था. आरोप था कि सरकार के कामकाज से जुड़ी सीकेट्र्स जानकारियां लीक की जा रही हैं और आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला कई लोगों के फोन टेप करवा रही हैं. आरोप यह था कि देवेंद्र फडणवीस के कहने पर फोन टेपिंग करवाए जा रहे हैं.


फडणवीस के दावे के बाद, ठाकरे सरकार ने ऐसे दिया जवाब

फडणवीस ने खुद यह दावा किया था कि उनके पास 6.3 जीबी डेटा के कॉल रिकॉर्ड्स हैं जो तात्कालीन गुप्तचर विभाग की कमिश्नर रश्मि शुक्ला द्वारा दिए गए हैं. इन कॉल रिकॉर्ड्स से ये साफ होता है कि कई पुलिस अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग लाखों-करोड़ों रुपए का कमीशन लेकर की गई थी.


इसके बाद मविआ सरकार हरकत में आई और एडिशनल चीफ सेकेट्री (होम) सीताराम कुंटे को इस काम में लगाया कि बड़े अधिकारियों और नेताओं की फोन पर की गई बातचीत आखिर लीक कैसे हो गई? अब यह केस और बीजेपी नेता गिरीश महाजन समेत 28 लोगों पर लगे वसूली और आपराधिक साजिश रचने के एक 2018 के मामले को अब शिंदे-फडणवीस सरकार के आदेश के बाद सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है.


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