Monday, 18 July 2022

बारिश के बाद अब मुंबई में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा! ये बीमारी किडनी और लिवर को कर सकती है फेल

मुंबई : मुंबई में भारी बारिश के बीच बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने चेतावनी जारी की है कि लेप्टोस्पायरोसिस (leptospirosis) के मामले आने वाले समय में बढ़ सकते हैं. जून महीने में जब महाराष्ट्र में बारिश (Rain In Maharashtra) शुरू हुई उसके बाद इस बीमारी के मामले भी सामने आने लगे हैं. जुलाई में अब तक 5 लेप्टोस्पायरोसिस के मामले सामने आ चुके हैं. हालांकि अभी तक इस बीमारी से किसी की मौत की खबर नहीं आई है. अन्य मानसून रोगों (Monsoon Diseases) में अब तक गैस्ट्रोएन्टराइटिस के 176 मामले, मलेरिया के 119 मामले, डेंगू के 19 और हेपेटाइटिस के 23 मामले सामने आए हैं. बीएमसी ने संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए लोगों को सलाह दी है कि वे रुके हुए पानी में ना जाएं और अपने आसपास साफ सफाई रखें.


बीएमसी ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि बीमारी के लक्षण दिखने पर आप अपना इलाज चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कराएं. इसके साथ ही कहा गया है कि इस बीमारी में डॉक्सीसाइक्लिन और एजिथ्रोमाइसिन लिया जा सकता है. बीएमसी ने 7 से 19 जुलाई के बीच 3,44,291 घरों का सर्वेक्षण भी किया है और लगभग 43,297 डॉक्सीसाइक्लिन की गोलियां वयस्कों को और 114 एजिथ्रोमाइसिन की गोलियां बच्चों को बांटे हैं. दरअसल ये तमाम लोग जमा पानी के संपर्क में थे.


लेप्टोस्पायरोसिस क्या है?

लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु रोग है, जो इंसान और जानवरों को प्रभावित करता है. यह रोग जीनस लेप्टोस्पाइरा के बैक्टीरिया के कारण होता है. इंसानों में इस बीमारी के लक्षणों की एक पूरी श्रृंखला दिखती है, हालांकि इससे संक्रमित कुछ व्यक्तियों में कोई लक्षण भी नहीं दिखते हैं. बैक्टीरिया खुले घावों, ठीक नहीं हुई त्वचा या म्यूकस के जरिए शरीर में प्रवेश करता है. इंसानों में यह ज्यादातर चूहों, कुत्तों, भेड़, घोड़ों और रैकून से फैलता है. यह वायरस जानवरों के गुर्दे में रहता है और पेशाब के माध्यम से मिट्टी और पानी को संक्रमित करता है. जिससे किडनी को नुकसान पहुच सकता है.


मिट्टी और पानी में रहते हैं इसके बैक्टीरिया

यह बैक्टीरिया महीनों तक मिट्टी और पानी में रह सकते हैं. सही इलाज के बिना लेप्टोस्पायरोसिस किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है इसके साथ-साथ दिमाग और रीढ़ की हड्डी के चारों ओर अंदरूनी सूजन पैदा कर सकता है. लिवर का फेल होना और सांस लेने में दिक्कतों की स्थिति भी उत्पन्न कर सकता है. यह स्थिति को इतनी गंभीर बना देता है कि इससे इंसान की मृत्यु भी हो सकती है. लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी के लक्षणों की एक पूरी श्रृंखला होती है जो अन्य बीमारियों के लिए गलत हो सकते हैं. इनमें तेज बुखार, सिर दर्द, ठंड लगना, मांस पेशियों में दर्द, उल्टी, पीलिया, आंखें लाल होना, पेट में दर्द होना और दस्त आना शामिल हैं.


ये होते हैं लक्षण


हालांकि, इनमें कई लक्षणों को अन्य बीमारियों के लिए भी देखा जाता है. लेकिन यह सब इसी बीमारी के लक्षण हैं. जबकि कई बार ऐसा हुआ है कि संक्रमित व्यक्ति में बिल्कुल भी लक्षण नहीं दिखे हैं. जब भी कोई व्यक्ति किसी दूषित स्त्रोत के संपर्क में आएगा तो 2 दिन से लेकर 4 सप्ताह के बीच वह बीमार हो सकता है. बीमारी की शुरुआत आमतौर पर बुखार और अन्य लक्षणों के साथ अचानक होगी. लेप्टोस्पायरोसिस दो चरणों में हो सकता है, पहले चरण के बाद बीमार व्यक्ति में बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी या दस्त के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. जबकि दूसरे चरण में यह और ज्यादा गंभीर हो जाएगा. इस चरण में रोगी के किडनी या लीवर के फेल होने के साथ उसे मेनिनजाइटिस भी हो सकता है. बीमारी कुछ दिनों से लेकर 3 सप्ताह या उससे अधिक समय तक रह सकती है और अगर रोगी को सही उपचार नहीं मिला तो उसे ठीक होने में महीनों लग सकते हैं.

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