Wednesday, 20 July 2022

महाराष्ट्र में भूजल बचाने को लेकर बड़ी पहल, जल संरक्षण उपायों की होगी मैपिंग

मुंबई: महाराष्ट्र में भूजल बचाने के लिए जल जीवन मिशन कार्यक्रम के तहत, जल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग ने राज्य में सभी भूजल आधारित संसाधनों और जल संरक्षण उपायों को मैप करने और 1:10,000 के पैमाने पर भूजल संसाधनों के अपडेट नक्शे तैयार करने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। इस तरह की पहल करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है।


गौरतलब है कि महाराष्ट्र की भौगोलिक और भूवैज्ञानिक स्थितियों के कारण, राज्य में लगभग 80% सिंचाई भूजल पर आधारित है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 85% पेयजल योजनाएं भी भूजल आधारित स्रोतों पर निर्भर है। आने वाले समय में भूजल की स्थिति और विकट हो सकती है। इस संकट से निपटने के लिए जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव संजीव जायसवाल, डॉ हृषिकेश यशोद (मिशन निदेशक, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन), चिंतामणि जोशी (आयुक्त, भूजल सर्वेक्षण और विकास एजेंसी) ने यह बड़ी पहल की है।


प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत लागू की जाने वाली नल जल आपूर्ति योजना के स्थायी स्रोत के निर्धारण की प्रक्रिया जोरों पर है। इन मानचित्रों का उपयोग इन नल-जल आपूर्ति योजनाओं के स्रोतों की पहचान करने और भविष्य के जल संरक्षण उपायों के व्यवस्थित कार्यान्वयन के लिए उपयुक्त भूजल संभावित क्षेत्रों को निर्धारित करने के लिए किया जाएगा। यह परियोजना भूजल सर्वेक्षण और विकास एजेंसी और महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (MRSAC), नागपुर द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। बोरवेल/ट्यूबवेल का स्थान तय करने, भूजल की गुणवत्ता से संबंधित जानकारी, भूजल स्तर के आधार पर भूजल का आकलन करने और अन्य सहायक जानकारी जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रदान किए जा सकते हैं।


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