Tuesday, 26 July 2022

जो राणे और भुजबल नहीं कर पाए वो शिंदे ने कर दिया, कैसे? उद्धव ठाकरे ने बताई यह वजह

मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में आज की तारीख में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शिवसेना (Shivsena) के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। जो काम नारायण राणे (Narayan Rane) और छगन भुजबल नहीं कर पाए। वह एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने कर दिया? आखिर कैसे? सामना अखबार के कार्यकारी संपादक संजय राउत (Sanjay Raut) के इस सवाल पर उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने यह जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिसे मैंने अधिकार दिया था, उसी ने मुझसे विश्वासघात किया। उस समय लोग मेरे मुंह पर नहीं बोल रहे थे लेकिन मुझे इसकी सुगबुगाहट सुनाई दे रही थी। ये कैसे मुख्यमंत्री हैं… नगर विकास विभाग मुख्यमंत्री के पास होना चाहिए, कहा जा रहा था मलाईदार विभाग है। लेकिन मैंने वह विभाग अपने पास न रखते हुए विश्वास करके उन्हें सौंप दिया था।


मैं वहां मलाई-वलाई खाने के लिए नहीं गया था, मैंने मेरे पास जो विभाग रखे थे उनमें एक सामान्य प्रशासन, दूसरा न्याय व विधि और हां, आईटी विभाग भी था। क्योंकि वास्तव में इस तकनीकी का उपयोग सभी के विभागों के लिए कुछ-न-कुछ करने में मददगार होगा, ऐसा मेरा विचार था।


निश्चित कहां गलती हुई, क्या लगता है?

उद्धव ठाकरे ने कहा कि गलती मेरी है और वह मेरे पहले ही फेसबुक लाइव में मैंने कबूल की है। अपराध मेरा है। वो यह कि मैंने उन लोगों को परिवार का समझकर उन पर अंधविश्वास किया।


मुख्यमंत्री बनना आपकी गलती थी?

इस सवाल पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि दो बातें हैं, मान लो यदि मैंने उस समय उन्हें मुख्यमंत्री बनाया होता तो उन्होंने आज और कुछ अलग ही किया होता। क्योंकि उनकी भूख मिटती ही नहीं है। मुख्यमंत्री पद भी चाहिए और अब शिवसेनाप्रमुख भी बनना है? शिवसेनाप्रमुख के साथ तुलना करने लगे हैं? यह राक्षसी महत्वाकांक्षा है। इसे दानवी प्रवृत्ति कहते हैं।

मतलब ऐसा है कि जो दिया वो मेरा तो मेरा, और जो तुम्हारा है वह भी मेरा, यहां तक तो था। अब इसका वो भी मेरा और उसका वो भी मेरा। यहां तक उनकी हवस पहुंच गई है। ऐसी लोभी प्रवृत्ति की कोई सीमा नहीं होती।


क्या महाविकास आघाड़ी का प्रयोग एक भूल थी?

उद्धव ठकरे ने कहा कि महाविकास अघाड़ी का प्रयोग अगर गलती होती तो लोगों ने विरोध किया होता, लेकिन ऐसा हुआ नहीं, जनता आनंदित थी। क्योंकि सरकार बनते ही हमने किसानों को कर्जमुक्त कर दिया। उसके बाद, मैं अभिमान के साथ कहूंगा कि कोरोना काल में मेरे मंत्रिमंडल के सभी सहयोगियों, प्रशासन और जनता ने उत्तम सहकार्य किया। केवल इसी और इसी वजह से देश के उन 5 टॉप मुख्यमंत्रियों में मेरा नाम आया।


मैं मेरा नाम नहीं कह रहा पर जनता के प्रतिनिधि के तौर पर मेरा नाम आया था। यदि सभी का सहयोग नहीं होता तो मैं कौन था? मैं अकेले क्या कर सकता था? ठीक है, मैं खुद भी घर से बाहर नहीं निकल रहा था क्योंकि मैं खुद लोगों को कह रहा था कि घर से बाहर मत निकलो।

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