Friday, 10 December 2021

मुंबईः बीजेपी नेता की पत्नी को बचाने पर नपे ADG समेत दो पुलिस अफसर, नागरिकता के लिए फर्जी दस्तावेज जुटाने का है मामला



बीजेपी नेता की पत्नी को बचाने की कोशिश में महाराष्ट्र पुलिस के दो सीनियर अफसरों पर गाज गिरी है। एडिशनल डायरेक्टर जनरल समेत दो अफसरों पर केस दर्ज किया गया है। आरोपी महिला को भी फर्जीवाड़े के मामले में नामजद किया गया है। खास बात है कि एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कुछ अर्सा पहले देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए इसे उजागर किया था।


जिन पुलिस अफसरों पर गाज गिरी उनमें एडिशनल डायरेक्टर जनरल देवेन भारती और एसीपी दीपक पतंगरे शामिल हैं। मामले के मुताबिक बीजेपी की अल्पसंख्य सेल के मुंबई उपाध्यक्ष हैदर आजम खान की पत्नी रेशमा ने भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए फर्जीवाड़ा किया था। पुलिस की जांच में पता चला कि जो दस्तावेज उन्होंने पासपोर्ट बनवाने के लिए दिए थे, वो सारे फर्जी हैं। रेशमा पर भी केस दर्ज किया गया है। पुलिस अफसर मामले में बोलने से बच रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, क्राईम ब्रांच की रिपोर्ट के आधार पर मालवानी थाने में केस दर्ज किया गया है। अभी तक किसी को अरेस्ट नहीं किया जा सका है। रिपोर्ट के मुताबिक- रेशमा बांग्लादेश की नागरिक है। उसने फर्जी दस्तावेज के जरिए यह दावा किया कि वो भारत की नागरिक है। उसने पासपोर्ट बनाने के लिए आवेदन किया था। पासपोर्ट बन भी गया था।


पुलिस को गड़बड़ झाले का पता चला तो जांच शुरू की गई। स्पेशल ब्रांच के अफसर दीपक कुरलकर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रेशमा ने अपने जन्म प्रमाण पत्र में खुद को पश्चिम बंगाल के 24 परगना का निवासी बताया था।

पुलिस ने क्रास चैक किया तो पता चला कि वहां जो पता उसने दिया वो जाली है। वहां उसके जन्म का कोई रिकार्ड नहीं मिला। उन्होंने इस मामले में मालवानी पुलिस थाने में पत्र लिखा। रेशमा इसी थाना क्षेत्र में रहती थी। पुलिस को कहा गया था कि इस मामले में केस दर्ज किया जाए।

कुरलकर 2017 में रिटायर हो गए थे। उनका कहना है कि पतंगरे ने उन्हें बताया कि देवेन भारती ने उनसे इस मामले में केस दर्ज ना करने को कहा था। कुरलकर का ये भी कहना है कि एडीजी ने उनसे भी कहा था कि रेशमा बीजेपी के बड़े नेता की पत्नी है। लिहाजा इस मामले में वह जांच करने का जोखिम न उठाए तो ही बेहतर है।

Lorem ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry.