Thursday, 18 November 2021

मलिक ने समीर वानखेड़े के खिलाफ दिए सबूत, बॉम्बे HC में जमा कराया बर्थ सर्टिफिकेट



(Maharashtra) में राज्य के अल्पसंख्यक और कौशल्य विकास मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) ने NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेडे (Sameer Wankhede) के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है. ऐसे में नवाब मलिक ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) को अतिरिक्त दस्तावेज सौंपे. उन्होंने आरोप लगाया है कि NCB के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े के स्कूल प्रवेश फॉर्म और प्राथमिक स्कूल सर्टिफिकेस के अनुसार वह मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.


दरअसल, बीते दिनों समीर के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ मानहानि (Defamation) का केस दायर किया था, जिसमें मलिक के आरोपों के लिए 1.25 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की थी. इस दौरान वानखेड़े ने कोर्ट से अपील की थी कि मलिक को उनके या उनके परिवार के खिलाफ मानहानि कारक आरोप’ लगाने से रोक लगाए.

इस दौरान NCP के नेता नवाब मलिक ने प्रेस काफ्रेंस करते हुए कहा कि कल सुबह जज के सामने मैंने कई अहम दस्तावेज रखे है. वहीं, इस मामले में 2.15 बजे चैम्बर में सुनवाई है. उन्होंने बताया कि समीर वानखेड़े ने अपना बर्थ सर्टिफिकेट बनाने में फर्जीवाड़ा किया है. इसके लिए मैंने महानगर पालिका और स्कूल का लिविंग सर्टिफिकेट पेश किया है. इस मामले में कोर्ट निश्चित रूप से संज्ञान लेगी. वहीं, वानखेड़े के पिता ने मेरे बोलने पर ट्वीट पर पाबंदी लगाने की मांग की है. हालांकि कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी.

बता दें कि मंत्री नवाब मलिक ने दावा किया है कि समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने एक मुस्लिम से शादी करने के लिए इस्लाम धर्म को अपना लिया था और समीर सहित उनके बच्चों को मुस्लिम के रूप में पाल पोष के बढ़ा गया है. इस दौरान मलिक ने कहा था सिविल सेवा परीक्षा में लाभ लेने के लिए समीर अपने पिता के महार समुदाय में वापस आ गया, जोकि एक अनुसूचित जाति (Schedule Caste) है.

गौरतलब है कि ऐसे में उन्होंने कोर्ट ने अपने आरोपों का समर्थन करने के लिए समीर वानखेड़े का बर्थ-सर्टिफिकेट दिखाया है, जिसमें उनके पिता का नाम दाऊद वानखेड़े और धर्म वाले कॉलम में मुस्लिम लिखा था. वहीं, वानखेड़े परिवार का कहना है कि ये बर्थ-सर्टिफिकेट प्रामाणिक नहीं था, लेकिन मलिक के एडवोकेट ने परिवार को समीर वानखेड़े का मूल बर्थ-सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने के लिए कहकर हाई कोर्ट में तर्क दिया है.




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