Maharashtra: मुंबई कांग्रेस को बड़ा झटका, महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपा शंकर सिंह भाजपा में होंगे शामिल



मुंबई कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. पुराने दिग्गज कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपा शंकर सिंह कल भाजपा में शामिल होंगे. कृपाशंकर सिंह मुंबई के कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं  अगले साल मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का चुनाव है. इसे देखते हुए मुंबई कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है. कल यानी बुधवार को कृपा शंकर सिंह भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे. नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल की उपस्थिति में वे भाजपा में शामिल होंगे.

बता दें कि इस बार मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भाई जगताप नियुक्त हुए हैं. भाई जगताप मराठा समाज से आते हैं. कांग्रेस की रणनीति इस बार महाराष्ट्र के भूमि पत्र को अहमियत देने की थी, इसलिए अध्यक्ष पद के लिए भाई जगताप को चुना गया. जबकि अब तक ऐसा होता रहा था कि महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष के लिए स्थानीय नेतृत्व को मौका मिलता था और मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के लिए उत्तर भारतीय नेतृत्व में से किसी नेता को चुन लिया जात था. इस रणनीति के तहत कृपा शंकर सिंह कांग्रेस अध्यक्ष रहे. संजय निरुपम रहे कांग्रेस अध्यक्ष रहे. लेकिन कांग्रेस नेतृत्व को  ऐसा लगा कि शायद इससे उनका स्थानीय वोट बैंक अन्य पार्टियों में जा रहा है. इसलिए मराठा और पिछड़ा कॉम्बिनेशन को ध्यान में रखते हुए भाई जगताप का चुनाव मुंबई अध्यक्ष के लिए हुआ और नाना पटोले को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया.

अब उत्तर भारतीय वोटरों को लुभाने की तैयारी में भाजपा

मुंबई में करीब 40 से 50 लाख उत्तर भारतीय मतदाता हैं. यानी उत्तर भारतीय वोटरों की कुल संख्या 25 प्रतिशत से ज्यादा है. कई संसदीय क्षत्रों में उत्तर भारतीय वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं. जब कृपाशंकर सिंह भाजपा में शामिल हो जाएंगे तो मुंबई का उत्तर भारतीय वोटर जो कांग्रेस की ओर रुख करता था, उन्हें भाजपा की ओर आकर्षित करने की रणनीति को रफ़्तार मिलेगी. वैसे भी मुंबई में उत्तर भारतीयों और गुजराती वोटरों की बड़ी तादाद भाजपा के प्रति ही अपनी निष्ठा जताती आई है. भाजपा ने इसी बात का खयाल रखते हुए कृपा शंकर सिंह को पार्टी  में लेने का निर्णय लिया है.

काफी दिनों से कृपाशंकर सिंह दवारा भाजपा में शामिल होने की खबरें सामने आ रही थीं. गणेशोत्सव में वे देवेंद्र फडणवीस के घर उनका आना-जाना लगा हुआ था. कृपाशंकर सिंह का भाजपा में जाना मुंबई कांग्रेस के लिए  बड़ा झटका माना जा रहा है. संजय निरुपम पहले ही हाशिए पर चले गए हैं. अब कृपा शंकर सिंह भाजपा में शामिल हो रहे हैं. इससे निश्चित रूप से उत्तर भारतीय वोटरों के मन में कांग्रेस के प्रति रवैया बदलेगा.

मुंबई में उत्तर भारतीय वोट बैंक का प्रभाव बहुत है

मुंबई में हिंदी भाषा-भाषियों की एक अच्छी खासी तादाद है. मुंबई में कहते हैं जन शक्ति उत्तर भारतीयों के पास है और धन शक्ति गुजरातियों के पास है. एक जमाने में जब मुंबई में टेक्सटाइल मिलें हुआ करती थीं तब मराठी भाषा-भाषी कामगारों (मजदूरों) की तादाद ज्यादा थी. लेेकिन जैसे-जैसे मिल बंद होते गए. मराठी भाषी मजदूर मुंबई से दूर जाकर बसते गए. कुछ मुंबई छोड़ कर गांव चले गए. ऐसे में मुंबई में मराठी भाषा भाषियों की संख्या कम होती गई. इसलिए मुंबई के चुनावों में उत्तर भारतीय वोटरों की खासी अहमियत है.

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हैं कृपाशंकर सिंह

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले कृपाशंकर सिंह साल 2004 में महाराष्ट्र के गृहराज्यमंत्री रह चुके हैं. 2009 में विधानसभा चुनावों में इनके नेतृत्व मेंं कांग्रेस को अच्छी कामयाबी मिली थी. मुंबई की कालीना सीट से ये  चुन कर आते रहे. बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले कृपाशंकर सिंह 1971 में मुंबई काम की तलाश में आए. सांताक्रूज की एक झुग्गी में रहते हुए इन्होंने किसी जमाने में वे आलू-प्याज बेचा. एक दवा कंपनी में काम किया.और देखते ही देखते महाराष्ट्र की राजनीति में अपना एक बड़ा नाम बनाया. इन पर 300 करोड़ से अधिक की संपत्ति अवैध रूप से जमा करने का आरोप है. आय से अधिक संपत्ति रखने से जुड़े मामले में फंसने की वजह से ये मुंबई की राजनीति में हाशिए पर चले गए थे. उत्तर भारतीयों में ये खासे लोकप्रिय हैं और अच्छी मराठी बोलते हैं.


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