Monday, 3 May 2021

‘लॉकडाउन नहीं, 10 लोगों से ज्यादा की भीड़ पर लगाओ पाबंदी’, कोरोना कंट्रोल के लिए लांसेट टास्क फोर्स का सुझाव

 'लॉकडाउन नहीं, 10 लोगों से ज्यादा की भीड़ पर लगाओ पाबंदी', कोरोना कंट्रोल के लिए लांसेट टास्क फोर्स का सुझाव

प्रतीकात्मक तस्वीर

देश में कोरोना (Coronavirus) की आई नई लहर में संक्रमण के नए मामलों के बढ़ने की दर काफी ज्यादा है. कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही मौतों का सिलसिला भी जारी है. पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 3,68,147 नए मामले सामने आए हैं और 3,417 लोगों की मौत हुई है. इस बीच, लैंसेट इंडिया टास्क फोर्स (Lancet India task force) ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार को कुछ सुझाव दिए हैं. अपने इन सुझावों में लैंसेट इंडिया टास्क फोर्स ने देशव्यापी लॉकडाउन का रास्ता अपनाने से इनकार किया है. पैनल का कहना है कि किसी भी स्थान पर 10 से ज्यादा व्यक्तियों की सभाओं पर पूरा प्रतिबंध होना चाहिए.

पैनल ने अपने सुझावों में मुख्य रूप से रोजाना सामने आए वाले मामलों, रोजाना नए मामलों में होने वाली वृद्धि दर, पॉजिटिविटी रेट, रोजाना होने वाली कोरोना टेस्टिंग और ICU बेड्स की संख्या का आकलन करने और इनमें सुधार लाने की सिफारिश की है. इसी के साथ, पैनल ने ये भी सिफारिश की है कि संक्रमण को रोकने के लिए किए जाने वाले उपायों में समाज के सभी वर्ग के लोगों के साथ, सभी उपायों के आर्थिक परिणामों का भी ध्यान रखा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि लॉकडाउन लागू करने जैसे कदमों की वजह से समाज के सबसे कमजोर वर्ग को मुसीबतें न उठानी पड़ें.

‘फुल लॉकडाउन? नहीं’ : लैंसेट इंडिया टास्क फोर्स

लैंसेट इंडिया टास्क फोर्स का कहना है कि संक्रमण को रोकने के लिए फुल लॉकडाउन (Lockdown) कोई विकल्प नहीं है, जबकि अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग कदम उठाए जा सकते हैं. जिन इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है, वहां लॉकडाउन की जरूरत हो सकती है, लेकिन जहां संक्रमण की रफ्तार कम है, वहां रोकथाम के दूसरे उपाय अपनाए जा सकते हैं. पैनल ने कहा कि अप्रैल के महीने में रिपोर्ट किए गए नए मामलों में वृद्धि की दर औसतन 6.8 प्रतिशत रही, जबकि इसी अवधि में रिपोर्ट की गई नई मौतों में वृद्धि की दर 8.3 प्रतिशत रही. पैनल का कहना है देश में इस समय एक्टिव 2.7 मिलियन से ज्यादा एक्टिव मामले हैं, जिन्हें देखते हुए और नए मामलों में लगातार हो रही वृद्धि को कम करने के लिए, इस समय हेल्थ सिस्टम को और मजबूत बनाना अनिवार्य है.

रिस्क के आधार पर क्षेत्रों को बांटा जाना चाहिए

पैनल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति फुल लॉकडाउन की वकालत नहीं कर सकता, इसलिए देश को अलग-अलग जोन्स में बांटा जाना जरूरी है- कम जोखिम वाले जोन, मध्यम जोखिम वाले जोन और ज्यादा जोखिम वाले जोन या हॉटस्पॉट्स.

पैनल ने कहा कि जिन इलाकों में संक्रमण के मामलों की रफ्तार कम (Low Risk Zone) है, वहां सीमित प्रतिबंध ही होने चाहिए. जैसे स्कूल और कॉलेज खोले जा सकते हैं, दुकानें, रेस्टोरेंट, मंदिर, ऑफिस और फैक्ट्रियां सोशल डिस्टेंसिंग के पालन और 50 प्रतिशत की क्षमता के साथ खोले जा सकते हैं.

पैनल ने ये भी कहा कि हालांकि, किसी भी स्थान पर 50 से ज्यादा लोगों के शामिल होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, साथ ही मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करवाया जाना चाहिए. जरूरी सेवाएं जैसे खाने-पीने की व्यवस्था, मेडिकल सेक्टर, लोकल ट्रांसपोर्ट, सार्वजनिक कार्य और प्रशासनिक सेवाएं खुली रह सकती हैं, साथ ही ऐसे जोन्स में संक्रमण के मामलों में आगे भी वृद्धि ना हो पाए, इसके लिए टीकाकरण कार्यक्रम को और बेहतर बनाने की जरूरत है.

मध्यम जोखिम वाले जोन (Medium Risk)

पैनल का कहना है कि जिन इलाकों में नए मामलों की वृद्धि दर 2 से 5 प्रतिशत के बीच है और टेस्ट पॉजिटिव रेशियो 5 और 10 प्रतिशत के बीच है और आईसीयू बेड्स का प्रतिशत भी 40 से 80 प्रतिशत के बीच है, वहां इनडोर गैदरिंग पर रोक लगाई जानी चाहिए. हालांकि, ऐसे स्थानों पर स्कूल खोले जा सकते हैं, साथ ही जरूरी सेवाएं खुली रहनी चाहिए, ताकि समाज के कमजोर वर्गों की सहायता भी हो सके.

हॉटस्पॉट्स

वहीं, हॉटस्पॉट जहां नए मामलों की वृद्धि दर 5 प्रतिशत से ज्यादा है और टेस्ट पॉजिटिविटी रेशियो 10 प्रतिशत से ज्यादा है, साथ ही आईसीयू बेड का प्रतिशत 40 प्रतिशत से कम है, वहां कुछ जरूरी सेवाओं को छोड़कर सभी प्रतिबंध लागू होने चाहिए, जैसे स्कूल और कॉलेज बंद होने चाहिए, दुकानें, रेस्टोरेंट, ऑफिस, मंदिरों को कम से कम 6 से 10 हफ्तों के लिए बंद किया जाना चाहिए. केवल समाज के कमजोर वर्गों की सहायता के लिए जरूरी सेवाएं खुली रहनी चाहिए, साथ ही ऐसे इलाकों में आरटी पीसीआर और रैपिड एंटीजन टेस्टिंग में तेजी लाई जानी चाहिए.

‘जीवन को बचाना है प्राथमिकता, अब भी है समय’

पैनल ने कहा कि जीवन को बचाना प्राथमिकता है और देश के पास अभी भी समय है कि वह आने वाले दिनों में संक्रमण को रोकने के लिए अपने हेल्थ सिस्टम को बेहतर बनाए, जैसे ज्यादा से ज्यादा संख्या में मेडिकल कर्मचारियों को ट्रेनिंग देना, ICU बेड्स की संख्या बढ़ाना, टेस्टिंग में तेजी लाना और ऑक्सीजन की सप्लाई को और बेहतर बनाना आदि. इसी के साथ, पैनल का कहना है कि घरेलू यात्राओं, विशेष रूप से ट्रेन या सड़क से यात्रा पर प्रतिबंध नहीं होने चाहिए, क्योंकि गरीबों के लिए ऐसी यात्राएं पहला साधन है.

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