एंटीलिया और मनसुख मर्डर केस:एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा से लगातार दूसरे दिन NIA की पूछताछ; सचिन वझे के एक खाते में 1.5 करोड़ रुपए मिले

 

NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या प्रदीप शर्मा को सचिन वझे के मंसूबों की जानकारी थी या नहीं।- फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या प्रदीप शर्मा को सचिन वझे के मंसूबों की जानकारी थी या नहीं।- फाइल फोटो।

एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन की हत्या के मामले की जांच करने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सचिन वझे के मेंटर रहे पूर्व ACP और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को लगातार दूसरे दिन पूछताछ के लिए बुलाया है। इससे पहले शर्मा से बुधवार को 8 घंटे तक पूछताछ हुई थी। हिरेन की हत्या के मामले में NIA यह जांच कर रही है कि क्या प्रदीप शर्मा को वझे के मंसूबों की जानकारी थी या नहीं।

NIA को वझे के एक बैंक खाते में 1.5 करोड़ रुपए होने की जानकारी भी मिली है। इस पर सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने बुधवार को NIA कोर्ट को बताया कि खुद को ईमानदार बताने वाले सचिन वझे के एक अकाउंट में इतनी बड़ी रकम मिलना शक पैदा करता है। NIA यह जांच करना चाहती है कि इतने पैसे कैसे और कहां से आए? इसी के आधार पर वझे की कस्टडी को बढ़ाने की मांग की गई।

मनसुख हिरेन भी एंटीलिया केस में शामिल था
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि मनसुख हिरेन भी मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियो खड़ी करने के मामले में शामिल था। NIA के मुताबिक, मनसुख पैसों के लालच में इस केस में वझे का साझीदार बना था। वहीं वझे ने दावा किया है कि मनसुख ने अपनी मर्जी से स्कॉर्पियो की चाबी उसे दी थी।

मनसुख सबसे कमजोर कड़ी बन गया था
NIA सूत्रों की मानें तो मनसुख लगातार पूछताछ होने से परेशान हो गया था और वह इस केस की सबसे कमजोर कड़ी बन चुका था। जिसके बाद 2 और 3 मार्च के बीच सचिन वझे ने उसे अपने रास्ते से हटाने की प्लानिंग की और विनायक शिंदे समेत कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर 4 मार्च की रात को मनसुख की हत्या कर दी गई। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में बताया कि इस मामले में भी कुछ और सबूत जुटाने हैं।

NIA, UAPA में 30 दिन की कस्टडी चाहती है
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) फिलहाल एंटीलिया विस्फोटक बरामदगी केस और स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या की जांच कर रही है। इससे पहले हिरेन की हत्या की जांच महाराष्ट्र ATS ने शुरू की थी और पूर्व कांस्टेबल विनायक शिंदे और क्रिकेट बुकी राजेश गोरे को अरेस्ट किया था। सचिन वझे 9 अप्रैल तक NIA कस्टडी में है, जबकि शिंदे और गोरे को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अदालत में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (UAPA) के तहत वझे को 30 दिन की कस्टडी में रखने की डिमांड की थी, जिसे अदालत ने फिलहाल खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगली बार पेशी के दौरान सचिन वझे को लेकर एक डिटेल हेल्थ रिपोर्ट पेश की जाए। जिसके बाद माना जा रहा है कि आज NIA वझे का मेडिकल करवा सकती है।

NIA के सामने कबूलनामें में वझे ने दो मंत्रियों का नाम लिया
एक दिन पहले पेशी के दौरान सचिन वझे ने अदालत के सामने एक लिखित बयान पेश किया। यह बयान उसने NIA की कस्टडी के दौरान दिया था। इसमें वझे ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के साथ ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर अनिल परब पर भी अवैध वसूली करवाने का आरोप लगाया।

लिखित बयान में वझे ने यह भी कहा है कि वसूली कांड की पूरी जानकारी अनिल देशमुख के PA को थी। सचिन वझे ने अपने बयान में कहा कि NCP चीफ शरद पवार ने उनकी बहाली का विरोध किया था। वे चाहते थे कि बहाली रद्द कर दी जाए।

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