मुंबई पुलिस में बगावत:महाराष्ट्र सरकार की बेरुखी से हताश IPS संजय पांडे ने कहा- छुट्टी पर जा रहा हूं, शायद ही कभी पुलिस फोर्स में लौटूं

 


महाराष्ट्र पुलिस के सबसे सीनियर अधिकारी 1986 बैच के IPS संजय पांडे छुट्टी पर चले गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखी चिट्ठी में कहा है कि उन्हें लगता है कि सेवा में लौटना है या नहीं, यह सोचने का वक्त आ गया है। बुधवार को DG होमगार्ड से महाराष्ट्र स्टेट सिक्योरिटी फोर्स (MSF) में तबादला होने के बाद संजय पांडे ने यह चिट्‌ठी लिखी है। पांडे की जगह मुंबई कमिश्नर के पद पर रहे परमबीर सिंह को होमगार्ड का DG बनाया गया है। परमबीर सिंह को एंटीलिया केस में सचिन वझे की गिरफ्तारी के बाद पद से हटाया गया है।

हमें सरकार ने हमेशा साइड पोस्टिंग में रखा
पांडे कहते हैं, 'कोई भी सरकार आए, हमें साइड पोस्टिंग में ही रखती है। वर्तमान सरकार भी हमारा करियर बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।' पांडे जब 1992-93 में DCP थे, तब वे धारावी में थे। वे इस जोन के पहले DCP (पुलिस उपायुक्त) थे। संवेदनशील एरिया होने के बावजूद उनके कार्यकाल में यहां कोई दंगा नहीं हुआ। 1997 में हुए एक बड़े घोटाले में उनकी जांच की तारीफ पूरा पुलिस महकमा करता है।

20 दिन की छुट्‌टी मांगी
पांडे ने कहा कि मैंने 20 दिन की छुट्‌टी मांगी है। मैंने इसके लिए पर्सनल कारण ही लिखा है। पर नौकरी मुझे करनी है। मेरी नौकरी सवा साल बची है। मुझे यह सोचने के लिए समय चाहिए कि मैं नौकरी करूं या नहीं। हिंदुस्तान में मुंबई इकलौता शहर है, जहां सिक्योरिटी फोर्स में IPS की नियुक्ति होती है। ऐसा कहीं नहीं होता है।

IPS का करियर चुना
पांडे कहते हैं कि मैने परीक्षा दी तो उस समय IAS, IFS की बजाय IPS का करियर चुना। मुझे पुलिस में नौकरी करनी थी। पर संयोग है कि मुझे कभी पुलिस यूनिफॉर्म पहनने का मौका नहीं मिला। मुझे कभी पुलिसिंग का मौका नहीं मिला। मैंने तो वॉलेंटरी रिटायरमेंट लेना चाहा, वो भी मुझे नहीं लेने दिया गया। 2006 में विजिलेंस में ज्वाइंट कमिश्नर बनने के बाद मैं बीमार हो गया। मुझे 4 साल तक पुलिस की सेवा से बाहर रखा गया।

2012 में फिर से वापसी
संजय पांडे कहते हैं कि 2012 में जब मैंने फिर वापसी की तो फिर से साइड पोस्टिंग ही मिली। मेरे करियर में तकरीबन 20 साल की साइड पोस्टिंग की नौकरी रही है। पांडे ने इकोनॉमिक अफेंस विंग (EOW) में भी काम किया है। इस दौरान उन्होंने हार्वर्ड से पढ़ाई भी की है।

एंटीलिया केस में चारों तरफ से घिर चुकी ठाकरे सरकार ने सचिन वझे की गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस के दामन पर लगे दाग को धोने के लिए 4 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया। इसी के तहत किए गए अपने तबादले से पांडे काफी निराश हैं।

पांडे की चिट्‌ठी से सरकार की फजीहत हो सकती है
माना जा रहा है कि अगर पांडे बगावती तेवर अपना लेते हैं तो सरकार की फजीहत और बढ़ सकती है। पांडेने कहा है कि अब वे शायद ही पुलिस फोर्स में वापस आएं। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी कमियों को ठीक करने के बजाय हम जैसे सीनियर मोस्ट अधिकारियों को मनमाने तरीके से ट्रांसफर कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को ट्रांसफर के पहले कम से कम एक बार उनसे प्रोटोकॉल (शिष्टाचार) के तहत बात तो कर लेनी चाहिए थी, पर सरकार ने इसकी भी जरूरत नहीं समझी।

कई साल से उपेक्षा के शिकार हैं पांडे
1986 बैच के तेजतर्रार IPS अधिकारी पांडे की पिछले कुछ साल से लगातार उपेक्षा की जा रही है और उन्हें साइड पोस्टिंग दी जाती रही है। जबकि पांडे की तारीफ मुंबई दंगों की जांच के लिए बनाए गए श्रीकृष्ण आयोग और 1993 के मुंबई ब्लास्ट मामले को संभालने के लिए एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्था कर चुकी है।

डीजी या कमिश्नर पद पर नियुक्ति के दावेदार हैं पांडे
वरिष्ठता के आधार पर संजय पांडे की नियुक्ति पुलिस महानिदेशक या फिर मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद पर की जा सकती थी। पर उन्हें ये पद तो दूर, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के DG का पोस्ट भी नहीं दिया गया, जो कि उन्हें दिया जा सकता था। पांडे को हर तरह से नजरअंदाज किया गया। मुंबई कमिश्नर की पोस्ट राज्य के डीजीपी के बराबर होती है। इसलिए मुंबई पुलिस का कमिश्नर डीजीपी के अंडर में नहीं आता है।

CM उद्धव ठाकरे को IPS संजय पांडे की लिखी चिट्ठी नीचे पढ़िए...


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