हाफकिन संस्था पूर्णकालिक निदेशक की प्रतीक्षा में !, 173 में से 57 पद रिक्त

हाल ही में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने हाफकिन इंस्टिट्यूट का दौरा करने से उसके पुर्नजीवित की बात चर्चा में है। लेकिन दुर्भाग्य से हाफकिन प्रशिक्षण, संशोधन एवं चाचणी संस्था में मंजुर पदों पर शत प्रतिशत नियुक्ति करने को लेकर सरकार उत्सुक नहीं है। 173 मंजुर पदों में 57 पद रिक्त होने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को हाफकिन संस्था ने दी है। ताज्जुब की बात यह है कि हाफकिन संस्था अब भी पूर्णकालिक निदेशक की प्रतीक्षा में है। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने हाफकिन प्रशिक्षण, संशोधन एवं चाचणी संस्था के पास विभिन्न पदों की जानकारी मांगी थी। कुल मंजुर पद, कार्यरत पद और रिक्त पदों की जानकारी का समावेश है। हाफकिन संस्था ने अनिल गलगली को 25 जनवरी 2021 तक रेकॉर्ड उपलब्ध कराया गया। इसमें कुल 173 मंजुर पद से 57 पदे रिक्त है और 116 पद कार्यरत है।
निदेशक, उप निदेशक, मुख्य प्रशासकीय अधिकारी पद रिक्त!
वर्ग अ अंतर्गत कुल 8 पदनाम वाले 28 मंजुर पद है जिसमें से 21 पदे रिक्त है। इसमें 1 निदेशक, 1 उप निदेशक, 6 सहायक निदेशक, 11 वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, 1 वैज्ञानिक सचिव,1 मुख्य प्रशासकीय अधिकारी ऐसी संख्या है। निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सीमा व्यास के पास है।
वर्ग ब अंतर्गत 23 मंजुर पदों में से 7 पद रिक्त है जिसमें 7 वैज्ञानिक अधिकारी का समावेश है। वर्ग क अंतर्गत 68 में से 47 पद कार्यरत है। जो 21 पद रिक्त है उसमें 2 में से 2 अधिक्षक पद रिक्त है। वही 9 वरिष्ठ तकनीकी सहायक, 3 वरिष्ठ लिपिक, 5 प्रयोगशाला सहायक, 1 सर्पपाल, 1 लिपिक ऐसे रिक्त पद है। वर्ग ड अंतर्गत 54 में से सिर्फ 8 पद रिक्त है जिसमें 5 प्रयोगशाला परिचर, 1 हवालदार, 1 सिपाही और 1 गृह स्वच्छ कम सफाईगार ऐसे पद रिक्त है।
अनिल गलगली के अनुसार हाफकीन इंस्टीट्यूट यह देश की सबसे पुरानी बायोमेडिकल संशोधन संस्था होते हुए वर्ष 2005 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा 306 मंजुर पदों को लेकर 173 तक सीमित किया गया और 133 पदों को रद्द किया। बड़े पैमाने पर पदों को रद्द कर हाफकिन को पुर्नजीवित करने के बजाय चतन बद्ध तरीके से बंद करने की साजिश है। इसीलिए रिक्त पद पर नियुक्ति नहीं की जा रही है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और मेडिकल शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने तत्काल ध्यान देकर रिक्त पदों पर शत प्रतिशत नियुक्ति करने के लिए संबंधितों के आदेश दे, ऐसी मांग अनिल गलगली ने की है।

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