कोरोना पॉजिटिव और निगेटिव का झमेला:दो बार दफनाई गईं, मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए बेटे ने 3 महीने दफ्तरों के चक्कर काटे

 

यह तस्वीर महिला को दूसरी बार दफनाने के दौरान की है। 17 दिसंबर की सुबह 8 बजे महिला का क्रिश्चियन रिवाज से अंतिम संस्कार हुआ।

कोरोना पॉजिटिव और निगेटिव के चक्कर में एक महिला को दो बार दफनाया गया। घटना नासिक के मनमाड़ की है। महिला को उसके पति के ठीक बगल में दफनाने के लिए उसके बेटे को पौने 3 महीने तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े और अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ी। महिला ने बेटे को पति के बगल में दफनाने की अंतिम इच्छा जताई थी।

दिल की बीमारी और निमोनिया से हुई थी महिला की मौत
मनमाड़ के डमरे मला इलाके की रहने वाली मंजूलता वसंत क्षीरसागर (76) का 21 सितंबर को निधन हो गया था। डॉक्टर ने मौत की वजह दिल की बीमारी और निमोनिया को बताया। प्रशासन ने कोरोना की आशंका के चलते शव का RT-PCR टेस्ट करवाया। संक्रमण का खतरा देखते हुए प्रशासन ने रिपोर्ट आने से पहले ही मंजुलता के पार्थिव को क्रिश्चियन रीति-रिवाज से मालेगांव के एक कब्रिस्तान में दफना दिया।

मालेगांव नगर निगम से NOC लेने के लिए करनी पड़ी जद्दोजहद
22 सितंबर को जब मंजूलता की रिपोर्ट निगेटिव आई तो उनके बेटे सुहास ने प्रशासन से पहली बार मां के शव को कब्र से निकालने की गुहार लगाई। सुहास मनमाड़ में नागरी सुविधा केंद्र पर काम करता है। मां की मौत के बाद उसे उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा।

सुहास ने पहले मालेगांव नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखा, पर कोई रिस्पांस नहीं मिला। इसके बाद सुहास लगातार नगर निगम गया। तकरीबन 64 दिनों बाद यानी 23 नवंबर को उसे नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिली। शव को बाहर निकालने के लिए निगम का NOC जरूरी था।

शव को मालेगांव से मनमाड़ तक लाने के लिए फिर मशक्कत
हालांकि, NOC पहला चरण था और मालेगांव तहसीलदार से भी मंजूरी चाहिए थी। 25 नवंबर को सुहास ने तहसीलदार को अर्जी लिखी। इसके 19 दिन बाद मालेगांव के तहसीलदार चंद्रजीत राजपूत ने मालेगांव में दफनाए शव को मनमाड़ ले जाने की अनुमति दे दी।

अब भी सुहास की राह आसान नहीं थी। उसे 100 रुपये के बॉन्ड पर नियम और शर्तें पालन करने का एफिडेविट, नगर निगम का NOC, मालेगांव कैंप के चर्च से शव ले जाने के लिए NOC, मनमाड़ क्रिश्चियन मिशनरी की NOC और मेडिकल सर्टिफिकेट जैसे कई दस्तावेज जमा करने पड़े।

मालेगांव के तहसीलदार के आदेशानुसार, शव को मालेगांव दंडाधिकारी के प्रतिनिधि एसपी विधाते समेत कई अफसरों और परिजन की मौजूदगी में 17 दिसंबर की सुबह 8 बजे दफनाया गया। मंजूलता को उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक, पति के ठीक बगल में पूरे रिवाज से दफनाया गया।

मां की अंतिम इच्छा पूरा कर सुकून मिला: बेटा
भास्कर से बात करते हुए सुहास ने बताया, कोरोना काल बहुत ही कठिन था। मां की अंतिम इच्छा के बावजूद भी सरकार के निर्देशों के आगे हम बेबस थे। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद से हमारा संघर्ष शुरू हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों, मनमाड़ और मालेगांव के धर्मगुरुओं ने मदद की। मां के जाने का दुःख है, लेकिन उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने का सुकून मिला।

कई पत्र लिखने के बाद मिली शव ले जाने की मंजूरी: तहसीलदार
मालेगांव के तहसीलदार चंद्रजीत राजपूत ने बताया, सुहास की अर्जी आने के बाद वरिष्ठ अधिकारी से चर्चा की गई। शव ले जाने की मांग के पीछे मां और बेटे का इमोशनल रिश्ता था। इसलिए हमने इस मामले में गंभीरता से काम किया। कई विभाग के लोगों को पत्र लिख अनुमति ली गई। आखिरकार एक बेटा अपनी मां की अंतिम इच्छा पूरी कर पाया।

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