पुणे: डेटा में गड़बड़ी के कारण इस साल नहीं भरे जा सके 80 प्रतिशत ट्रैफिक चालान, 60 करोड़ का नुकसान

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ट्रैफिक पुलिस। प्रतीकात्मक फोटो.

भारत में ट्रैफिक नियमों (Traffic Rule) के उल्लंघन पर अब बड़े-बड़े फाइन लगाए जाते हैं, लेकिन पुणे (Pune) से आए डेटा के मुताबिक 80 प्रतिशत मामलों में लोगों ने फाइन ही नहीं भरा है. लॉकडाउन के कारण ज्यादातर लोगों ने अपने फाइन नहीं भरे हैं. 2019 में फाइन न जमा करने के मामले 64.34 प्रतिशत थे जो दिसंबर के दूसरे हफ्ते तक 79.59 प्रतिशत हो गया.

पुणे के ट्रैफिक पुलिस उपायुक्त (DCP), राहुल श्रीराम के आंकड़ों के मुताबिक ट्रैफिक नियम (Traffic Rule) के उल्लंघन के मामलों की संख्या में कमी आई है. 2019 और 2018 की तुलना में 2020 में ट्रैफिक उल्लंघन के मामलों में कमी है.

60 करोड़ का बकाया फाइन

राहुल श्रीराम ने कहा “अब तक 80 प्रतिशत ऐसे फाइन हैं जो भरे नहीं गए हैं. ये फाइन लगभग 59,96,12,400 करोड़ रुपये का है वहीं इस साल अब तक 15,37,10,853 करोड़ रुपये फाइन के रूप में मिल चुके हैं.” लॉकडाउन के कारण परिवहन न होने से फाइन के मामलों पिछले दो वर्षों की तुलना में कम हैं, लेकिन जिन मामलों में जुर्माना बकाया है, उनकी वार्षिक मामलों की संख्या निरंतर बनी हुई है. 2019 के अंत में 14,67,211 मामले थे जिनका जुर्माना नहीं भरा गया था.

पर्याप्त डेटा नहीं

ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि उल्लंघनकर्ताओं के बारे में जानकारी भेजने के लिए उपयोग किए जाने वाले डेटा के साथ कई समस्याएं हैं. उदाहरण के लिए, कॉन्टैक्ट इन्फॉर्मेशन गायब है या ऑनलाइन सिस्टम में दिखाया गया नंबर ट्रैफ़िक अधिकारियों द्वारा संदेश भेजने के लिए गलत है. जबकि ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) को दोषी ठहराते हैं वहीं आरटीओ अधिकारियों के पास बताने के लिए एक अलग कहानी होती है.

पुणे के डिप्टी RTO संजय सासने ने बताया “डेटा हमारे द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जाता है. राष्ट्रीय सूचना केंद्र (NIC), सड़क परिवहन मंत्रालय के माध्यम से डेटा उपलब्ध कराया जाता है. नए वाहन पंजीकृत होने पर हमें डेटा मिलता है. लेकिन, V4 प्रणाली के तहत, जो 1 अप्रैल, 2019 से लागू है, इस प्रक्रिया में शामिल हर सरकारी एजेंसी की पहुंच है”.

2007 से पहले के वाहन नहीं हुए अपडेट

जो वाहन नंबर 2007 से पहले खरीदे गए थे, और अभी भी एक ही व्यक्ति के स्वामित्व में हैं, अभी तक डिजीटल नहीं हुए हैं. इसलिए, वे नंबर RTO और पुलिस के ऑनलाइन सिस्टम से गायब हैं.

सासने ने कहा “हम उस कार्य को करने के लिए एक एजेंसी को फाइनल नहीं कर सकते. यदि उन वाहनों को बेचा गया है, तो वे सिस्टम में फीड हुए हैं. हालाँकि, जो अभी भी उसी व्यक्ति के नाम में 2007 की तरह हैं, अभी तक डिजिटल नहीं हैं.”

फाइन न भरने पर होगी कार्रवाई

ट्रैफ़िक नियम के उल्लंघन के लिए जिन नंबरों से शुल्क लिया जाता है, और उनके फाइन नहीं मिले हैं उन पर कार्रवाई हो सकती है. क्योंकि यह उनके वाहन रिकॉर्ड पर दिखेगा.

आरटीओ अधिकारियों के मुताबिक, ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ के अधिकारी फाइन न मिलने पर वाहन स्वामी को वांटेड के रूप में चिन्हित कर सकते हैं.

सासने ने कहा “पुलिस खुद वांटेड कर सकती है जैसा वह चाहती थी. लेकिन अगर वे हमें लाइसेंस नंबर भेजते हैं, तो हम उन्हें भी चिह्नित कर सकते हैं। पुलिस के अनुरोध करने पर, हम लाइसेंस रद्द भी कर सकते हैं.”

पुलिस के पास नहीं है बेहतर सिस्टम

“पेडेस्ट्रियन फर्स्ट” नामक नागरिक समूह के संयोजक प्रशांत इनामदार के अनुसार, जो फाइन नहीं भरे गए हैं उनमें से ज्यादातर जुर्माना ई-चालान के होंगे.

उन्होंने कहा, “जब पुलिस नाकाबंदी करती है तो तुरंत फाइन जमा कर दिया जाता है. जुर्माना अदा न करने की इच्छा हो सकती है लेकिन ऐसे 2-3 पहलू हैं जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है. मुझे यकीन नहीं है कि पुलिस के पास तंत्र है जो ट्रैफिक उल्लंघन पर आसानी से चालान वितरित करता है. जुर्माना न भरने का सबसे बड़ा कारण यही होना चाहिए. ”

उन्होंने आगे कहा “नियम तोड़ने वालों के कॉन्टैक्ट डिटेल्स के लिए आरटीओ डेटा सबसे अधिक अपर्याप्त है और अयह अपडेट भी नहीं हो रहा. चालान की भौतिक डिलीवरी और उसका वितरण फोन पर करने के लिए डेटाबेस का अपडेट होना जरूरी है. एक संभावना यह भी है कि जिन लोगों को चालान प्राप्त हुए हैं वे भुगतान नहीं करते हैं, लेकिन एक प्रमुख मुद्दा यह है कि क्या चालान उचित समय अवधि के भीतर लोगों को मिल रहा है.”

कैसे चेक करें पेंडिंग चालान

अगर आप इस बारे में निश्चित नहीं हैं कि आपके वाहन पर कोई जुर्माना है या नहीं, तो mahatrafficechallan.gov.in पर जाएं और अपना वाहन नंबर जांचें. अगर चालान है तो उल्लंघन के कारण के साथ अटैच फोटो की जांच करें, इसमें जगह का नाम भी रहेगा. अगर फाइ है तो इसे भर कर अपना ड्यू क्लियर कर लें. चालान का फाइन ऑनलाइन भरा जा सकता है. अगर ऐसा लगता है कि चालान गलत कटा है तो अपनी सूचना cctvtrafficpune@gmail.com पर भेजें.

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