BJP नेता सोमैया ने महाराष्ट्र CM की पत्नी रश्मि और अर्नब की शिकायतकर्ता के बीच हुए जमीन घोटाले के सबूत दिए



दिनेश वर्मा
मुंबई. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और सांसद किरीट सोमैया ने बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे पर जमीन घोटाले को लेकर बड़े आरोप लगाए हैं। सोमैया ने ट्वीट कर बताया कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर एंड चीफ अर्नब गोस्वामी को फंसाने का मुख्य कारण एक जमीन घोटाला है जो अर्नब मामले में शिकायतकर्ता स्वर्गीय अन्वय नाइक के परिवार और रश्मि ठाकरे के बीच हुआ था। 

Smt Rashmi Uddhav Thackeray & Manisha Ravindra Vaykar jointly bought several pieces of land at Korlai, Murud Raigad from Late Anvay Naik, Smt Akshta Naik..in March 2014 at ₹2.20 Crores. The reason to target ??

pic.twitter.com/nS7rf2H5M1

— Kirit Somaiya (@KiritSomaiya)

दरअसल, किरीट सोमैया ने ट्वीट कर बताया कि अर्नब को साल 2018 के केस में सिर्फ इसलिए फसाया जा रहा है ताकि जमीन विवाद सुलझ जाए। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे और नाइक परिवार के बीच में रायगढ़ स्थित मुरुद में किसी जमीन को लेकर साल 2014 के मार्च महीने में 2.20 करोड़ की खरीदारी हुई थी। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि इस संबंध में मेरे पास कईं सबूत है। उन्होंने कहा कि 'मैंने जब रायगढ़ कलेक्टर और एसपी से इस विवादित भूमि का रिकॉर्ड चेक कराया तो यह पता चला कि इस जमीन को कईं टुकड़ों में रश्मि द्वारा खरीदा गया है।

I verified concern documents &
sent to Collector & SP. 7/12 land records (Murud Raigad) Maharashtra Government Website of Land Records, election affidavit, it's confirm CM Uddhav Thackeray (Family Wife) had land transaction with Late Anvay Naik (Family)

— Kirit Somaiya (@KiritSomaiya)

इससे पहले भी किरीट ने लगाया था सीएम पर करोड़ों के घोटालों का आरोप
इससे पहले भी भाजपा नेता किरीट सोमैया ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर कथित रूप से 12,000 करोड़ रुपये का घोटाला करने के लिए गंभीर आरोप लगाया था। किरीट सोमैया ने दावा किया था कि उद्धव ठाकरे के कहने पर, महानगरपालिका आयुक्त ने 72 घंटे के भीतर 3,000 और 7000 करोड़ रुपये की निजी बिल्डर की जमीन खरीदने का प्रस्ताव पारित किया।

क्या कहा था किरीट ने अपनी शिकायत में?
किरीट ने अपनी शिकायत में कहा था कि मुख्यमंत्री ने घोटाले को अंजाम देने के लिए टास्क फोर्स का इस्तेमाल करने की कोशिश की। प्रस्ताव को 20 जुलाई, 2020 को एक बैठक में पारित किया गया, जिसमें एक टास्क फोर्स का गठन कोविड की सलाह के लिए किया गया था और सलाह के अलावा कोई अधिकार नहीं था। साथ ही, इस टास्क फोर्स की बैठक के मिनट भी नहीं रखे गए थे।

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