मैक्सलाईफ कोविड अस्पताल को नोटिस


उल्हासनगर. कोरोना के मरीजों से अवैध बिल वसूलने के लिए मनपा के लेखा परीक्षण समिति ने उल्हासनगर कैंप-3 स्थित मैक्सलाइफ नामक एक निजी अस्पताल को नोटिस जारी की है. नोटिस में 82 कोरोना रोगियों से 36 लाख रुपए की ज्यादा वसूली करने का आरोप लगाया गया है.

कोरोना मरीज से मनमानी बिल वसूलने की शिकायतें राज्य सरकार को मिलने के बाद निजी अस्पताल के बिलों के ऑडिट के लिए महानगरपालिका स्तर पर एक कमेटी नियुक्त की गई है. उल्हासनगर के मनपा कमिश्नर डॉ. राजा दयानिधि द्वारा गठित समिति में सहायक मुख्य लेखा परीक्षक अशोक मोरे और क्लर्क पूजा पतंगे को नियुक्त किया गया है.

अस्पताल में 82 कोरोना रोगियों का इलाज किया गया था

एक जुलाई से उल्हासनगर मनपा क्षेत्र के निजी अस्पतालों को कोविड रोगियों का इलाज करने की अनुमति दी गई थी, इसमें न्यूरो सर्जन विवेक अग्रवाल के मैक्सलाइफ हॉस्पिटल को भी अनुमति मिली है. 1 जुलाई से 17 जुलाई की अवधि के दौरान, इस अस्पताल में 82 कोरोना रोगियों का इलाज किया गया था. ऑडिट कमेटी ने इन मरीजों द्वारा भुगतान किए गए बिलों की जानकारी मांगी. उस समय बिल में पूरे बेड और मेडिसिन चार्ज के लिए 9 हजार रुपए दिखाए गए थे.


…तो मरीजों को अतिरिक्त राशि की प्रतिपूर्ति करनी होगी


इस संबंध में सहायक मुख्य लेखा परीक्षक अशोक मोरे ने कहा कि सरकार ने कोरोना रोगियों के इलाज के लिए 4 हजार रुपए से लेकर 9 हजार रुपए तक इस तरह 3 प्रकार के बेड उपलब्ध कराए है. आईसीयू में कितने दिन मरीजों को रखा गया, सामान्य वार्ड में कितने दिन का खुलासा नहीं किया गया. यह भी ज्ञात नहीं है कि कौन सी दवाएं दी गई है. इन सभी अनियमितताओं की राशि लगभग 36 लाख 40 हजार रुपए है. इसलिए अस्पताल को नोटिस भेजकर खुलासा मांगा गया है. मोरे ने यह भी बताया कि यदि यह खुलासा सही नहीं है. तो मरीजों को अतिरिक्त राशि की प्रतिपूर्ति करनी होगी.


स्थानीय नगरसेविका ने की शिकायत


स्थानीय समाजसेवी शिवाजी रगड़े ने बताया कि इस अस्पताल द्वारा मरीजों से अधिक पैसों की वसूली करने का आरोप लगाते हुए स्थानीय नगरसेविका सविता तोरणे-रगड़े ने मनपा में लिखित शिकायत भी की है. इसी तरह इस अस्पताल में इलाज करा चुके अंबरनाथ निवासी हाजी यूसुफ शेख ने बताया कि इस अस्पताल प्रबंधन ने उनके साथ भी एक तरह से धोखाधड़ी की है. शेख का कहना है कि उनसे एक दिन के 14 हजार वसूले गए है. हाजी यूसुफ शेख ने मांग की है. यदि जांच में अस्पताल प्रबंधन दोषी पाए गए तो उनका अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए.

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