हर रोज मरती वालधुनी नदी...

उल्हासनगर- कोरोना के कारण शुरू लॉकडाउन के चलते उल्हासनगर, अंबरनाथ, बदलापुर परिसर स्थित तकरीबन 90 फीसदी कंपनियां बंद हैं. बावजूद इसके उल्हासनगर स्टेशन के पास गौशाला पूल से बहती वालधुनी नदी कभी लाल रंग की बन जाती है तो कभी पीली। कभी ऑरेंज, कभी नीली, कभी हरी, कभी काली रंग में बहती है। लेकिन अब इसका रंग ग्रे होने से लोगों में आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। 
आपको बता दें कि अंबरनाथ तथा उल्हासनगर से कभी शुद्ध पानी के रूप में बहने वाली वालधुनी नदी बदलापुर, अंबरनाथ तथा उल्हासनगर की विविध केमिकल कंपनियों द्वारा छोड़े जाने वाले रसायन युक्त पानी के चलतें अब एक दूषित नाले के रूप में तब्दील हो चुकी है। नदी को उसका पुराना वैभव दिलाने एवं इसके पानी से उल्हास नदी भी प्रदूषित न हो इसको लेकर इस नदी को स्वच्छ बनाने के लिए कई सामाजिक संगठन और विशेष रूप से हिराली फाउंडेशन की सचिव सरिता खानचंदानी ने स्थानीय स्तर पर जहां अनशन-प्रदर्शन करके सुस्त प्रशासन से लड़ाई लड़ी वहीं राष्ट्रीय स्तर पर सुप्रीम कोर्ट तक जाकर अपनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया। इसके बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थानिक स्वराज्य संस्थाओँ को नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त व आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए और कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर मनपा, अंबरनाथ तथा बदलापुर नपा पर 95 करोड़ रुपये का दंड निर्धारित किया था। दशकों से प्रदूषण की मार झेल रहीं वालधुनी नदी को उस समय नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन हालत ढाक के तीन पात जैसे ही निकले। आज भी यहाँ तक कि लॉकडाउन के बावजूद भी अंबरनाथ व उल्हासनगर में कुछ जगह चोरी छुपे जींस के कपड़ों की धुलाई का चालू है। कहा जा रहा है कि नदी के पानी का यूँ रंग बदलना केमिकल कंपनियों और जींस वाश वालों की वजह से हो सकता है।

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