Monday, 18 May 2020

कोर्ट ने खारिज किया, मोदी ने हाउस टू हाउस सर्विलंस स्वीकार किया

अनिल गलगली
मुंबई - आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली ने मुंबई हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की जिसमें कोरोना पॉजिटिव मामलों की पहचान के उद्देश्य से नागरिकों की होम स्क्रीनिंग करने और इस तरह के मामलों को अलग-थलग करने और उपचार करने के उद्देश्य से लगातार और प्रभावी तरीके से फैलने को रोकने के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई। उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका को खारिज कर दिया गया, जिसमें आबादी के आकार और बस्तियों के घनत्व को देखते हुए व्यावहारिक बाधाओं का उल्लेख किया गया था। लेकिन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अनिल गलगली की बात को स्वीकार किया और इसे लॉकडाउन 4.0 के लिए दिशानिर्देशों में शामिल कर दिया हैं।
आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली ने पीएम श्री नरेन्द्र मोदी के सामने अभ्यावेदन दिया था कि कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के मद्देनजर मुंबई में डोर टू डोर स्क्रीनिंग को लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने मुंबई में कोरोना मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए मांग की थी। तेजी और आक्रामक रूप से कोरोना रोगियों की पहचान करनी चाहिए, ताकि मरीजों को अलग कर उपचार तुरंत हो सके। इससे कोरोना पॉजिटिव रोगियों के मामलों को भी कम किया जा सकेगा जब उनकी पहचान की जाएगी और उन्हें जल्दी अलग किया जाएगा।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी लॉकडाउन 4.0 के लिए दिशानिर्देशों में, केंद्र सरकार ने कोरोना मामलों का पता लगाने पर जोर दिया हैं और घर में निगरानी के साथ-साथ रोकथाम क्षेत्रों में प्रसार को रोकने के लिए सभी उपाय किए जाने की सिफारिश की हैं। अनिल गलगली ने कोरोना मामलों को कम करने में सक्रिय कार्रवाई के लिए कंटेनर ज़ोन में घर की निगरानी के लिए और सिफारिशों पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को उनकी मांग पर संज्ञान देने के लिए धन्यवाद दिया, जिसे लागू करने की सबसे ज्यादा जरूरत थी। अनिल गलगली ने उम्मीद जताई कि स्थानीय प्रशासन अब इसे कार्यक्षमता से अमल में लाएगा।

Lorem ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry.